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Bareilly News: अलार्म पर जागे, बच्चों को छोड़ने स्कूल की ओर भागे अभिभावक

Connect News 24

बरेली। स्कूल वाहनों से विद्यालय जाने वाले बच्चों के अभिभावक शुक्रवार को परेशान हुए। वाहन चालकों की हड़ताल के कारण उन्हें सुबह जल्दी उठकर बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा, फिर दोपहर बाद लेने जाना पड़ा। कई बच्चों को तो छुट्टी करनी पड़ गई। हालांकि, देर शाम महापौर के आश्वासन के बाद हड़ताल वापस ले ली गई।

स्कूल वाहनों का अनुबंध कराने के प्रशासन के आदेश के बाद वाहन चालकों का विरोध शुरू हुआ। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हाल ही में अधिकारियों और निजी स्कूल संचालकों ने वाहनों का अनुबंध करने के फैसले पर सहमति जताई है, लेकिन वाहन चालक इसके विरोध में हैं।

इसी की वजह से स्कूल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को हड़ताल की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष निशांत पनवार ने बताया कि वाहनों का अनुबंध कराने के लिए प्रशासन दबाव बना रहा है। हम इसके पक्ष में नहीं हैं। महापौर उमेश गौतम ने एसोसिएशन के सदस्यों को फिलहाल टैक्सी परमिट पर ही वाहन चलाने का आश्वासन देकर गतिरोध को खत्म कराने की पहल की। इस पर खुशी जताते हुए एसोसिएशन के सदस्यों ने शनिवार से वाहन संचालन की बात कही।

अनुबंध कराने पर दोगुना हो जाएगा किराया

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दिलीप गुप्ता ने बताया कि अगर वाहनों को अनुबंधित किया गया तो किराये की दरें दोगुनी करनी पड़ेंगी। जिस वाहन के लिए अभिभावक अभी 1,600 रुपये देते हैं, फिर उन्हें 3,200 रुपये खर्च करने होंगे। वाहन पर पीले रंग की पट्टी बना दी जाएगी। अनुबंध नियमों के तहत हम वाहनों का स्कूल के अलावा कहीं और इस्तेमाल नहीं कर सकते। इससे हमारी आय भी प्रभावित होगी।

कोई सुबह जल्दी उठा तो किसी ने ली आधे दिन की छुट्टी

मेरा बेटा कक्षा एक में पढ़ता है। इस समय उसके यूनिट टेस्ट चल रहे हैं। मैं सुबह आठ बजे सोकर उठता हूं। बृहस्पतिवार शाम को ही फोन पर सूचना मिली कि शुक्रवार को वैन नहीं आएगी। इसलिए अलार्म लगाकर सोए। सुबह जल्दी उठना पड़ा। -मोहम्मद फैज रजा, खुशवू एन्क्लेव

मेरा बच्चा कक्षा छह में पढ़ता है। सुबह तो सब ठीक था, वैन वाला ले गया था, लेकिन बाद में 11 बजे फोन करके कह दिया कि बच्चे को घर छोड़ने नहीं आएगा। उनकी हड़ताल है। खुद लेकर आना होगा। इसलिए काम से ब्रेक लेकर लेने आया हूं। -अजय गुप्ता, ग्रीन पार्क

कल रात को वैन वाले ने व्हाट्सएप पर मेसेज के जरिये सूचना दी कि वह बच्चे को लेने नहीं आएगा। सुबह जल्दी उठकर खुद बच्चे को छोड़ने आई। लेकर भी खुद ही जा रही हूं। समस्या यह है कि पता नहीं यह कब तक चलेगा। -प्रतिभा सिंह, जागृतिनगर

वैन वाले ने मेसेज के जरिये जानकारी दी। सुबह पति बच्चे को छोड़ने गए थे, अब मैं लेने आई हूं। जब तक कोई साधन नहीं हाे जाता, तब तक ऐसे ही करना पड़ेगा। इससे सुबह का काम काफी प्रभावित हुआ। जल्दी उठना पड़ा। -रूबी तिवारी, सुभाषनगर

हमारी कॉलोनी में बहुत से परिवारों ने शुक्रवार को बच्चों की छुट्टी कराई है। क्योंकि माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। अचानक खुद छुट्टी नहीं ले सकते। ऐसे में बच्चों को स्कूल छोड़ना और फिर लेने जाना आसान नहीं है। -अंशु गुप्ता, स्टेट बैंक कॉलोनी

आरटीओ को स्कूल संचालकों, ट्रांसपोर्टरों और अभिभावकों से भी बात कर फैसला लेना चाहिए। हड़ताल में सभी लोग शामिल नहीं हैं। कई स्कूलों में वाहन चालक बच्चों को लेने और छोड़ने भी गए। – विशाल मेहरोत्रा, प्रदेश महामंत्री, रुहेलखंड अभिभावक सेवा समिति

विरोध की वजहें

– मानक पूरे तो क्यों कराएं अनुबंध।

– व्यावसायिक वाहनों के अतिरिक्त चालान का विरोध।

– अनुबंध के बाद निजी प्रयोग में नहीं ले सकते वाहन।

– स्कूल समय के बाद वाहन का प्रयोग नहीं कर सकते।

– चालक की अतिरिक्त आय प्रभावित।

– शहर के बाहर नहीं जा सकेंगे वाहन।

– दो गुनी करनी होंगी किराये की दरें।

आज आरटीओ से मिलेंगे अभिभावक

अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने बताया कि शनिवार को अभिभावक और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के सदस्य आरटीओ से बात करके स्कूल वाहनों के मानकों पर बात करेंगे। सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। हड़ताल के दौरान वाहन चालकों ने दोगुने किराये का हवाला देकर अभिभावकों को अपने साथ लिया।

नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे ऑटो, ई-रिक्शा

स्कूल वाहन चालकों की हड़ताल के दौरान नियमों को ताक पर रखकर ऑटो और ई-रिक्शा बच्चों से खचाखच भरकर दौड़ते रहे। प्रशासन या स्कूल प्रबंधन भी इसके प्रति लापरवाह दिखे। लगभग सभी निजी स्कूलों के बाहर यही स्थिति रही।


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