Bareilly News: संसाधनों का बुरा हाल, हौसले की दौड़ लगाएंगे नौनिहाल
बरेली। परिषदीय स्कूलों में बृहस्पतिवार से ब्लॉक स्तरीय पर खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो रही हैं। प्रतियोगिताओं का यह दौर दिसंबर के दूसरे सप्ताह में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन तक जारी रहेगा। हालांकि, अब तक न तो खेल ग्रांट जारी की गई है, न ही खेल सामग्री खरीदे जाने के लिए बजट की व्यवस्था की गई है। लिहाजा, बेसिक के विद्यार्थी बिना संसाधनों के ही हौसलों की दौड़ लगाएंगे।
प्राथमिक विद्यालयों को पांच हजार और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दस हजार रुपये की राशि खेल ग्रांट के तहत जारी की जाती है। इस राशि से विद्यालय स्तर पर इनडोर और आउटडोर खेलों के लिए सामग्री खरीदी जाती है। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर खेलों के आयोजन के लिए पांच हजार रुपये की ग्रांट अलग से जारी की जाती है। अब तक राशि जारी न होने की वजह से खेल सामग्री नहीं खरीदी जा सकी है। लिहाजा, विद्यार्थी पुरानी सामग्री से ही प्रतियोगिता में हुनर आजमाते नजर आएंगे।
ये खेल प्रतियोगिताएं प्रस्तावित
अक्तूबर के आखिरी सप्ताह तक ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएं।
नवंबर के दूसरे सप्ताह तक जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं।
नवंबर के चौथे सप्ताह तक मंडल स्तरीय प्रतियोगिताएं।
दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं।
हर साल देर से जारी होती है ग्रांट
हर साल खेल ग्रांट की राशि देरी से जारी होती है। इसकी वजह से प्रतियोगिताओं के आयोजन में भी अव्यवस्था होती है। कई बार विभाग को इस बारे में सूचित भी किया गया है। हर बार आयोजन के लिए शिक्षकों को फंड जुटाना पड़ता है। – विनोद कुमार शर्मा, शिक्षक नेता
ब्लॉक स्तर पर ही हो जाता है बंदरबाट
खेल ग्रांट के लिए हर साल बजट आता है, लेकिन कभी आयोजन में प्रयुक्त नहीं हो पाता है। इसकी वजह है कि आयोजन के समय तक बजट जारी ही नहीं हो पाता। देरी से राशि जारी होने पर अधिकारी अपने स्तर पर ही बंदरबांट कर लेते हैं। – प्रमोद कुमार, शिक्षक, क्यारा ब्लॉक
बहुत कम रहती है ग्रांट की राशि
खेल ग्रांट की राशि काफी कम होती है। खेल आयोजन के लिए महज पांच हजार रुपये जारी होते हैं, जबकि वास्तव में एक बार खेल आयोजन के लिए 20 से 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। धन के अभाव में आयोजन का स्तर प्रभावित होता है। – सतेंद्र पाल, शिक्षक नेता
वर्जन
पिछले साल खेल सामग्री के लिए जो पैसा आया था, उसी से प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। ज्यादातर प्रतियोगिताएं एथलेटिक्स से संबंधित हैं। इनमें रेस, खोखो आदि की प्रतियोगिताएं शामिल हैं। लिहाजा, बजट के अभाव में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता। – संजय सिंह, बीएसए



