Bareilly News: बंगलूरू की तर्ज पर शहर की सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग कराएगा पीडब्ल्यूडी
बरेली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) बारिश के दिनों में उखड़ जाने वाली सड़कों की अब केमिकलयुक्त व्हाइट टॉपिंग कराएगा। यह कार्य बंगलूरू की तर्ज पर किया जाएगा। ऐसा होने पर सड़क 25 वर्ष तक खराब नहीं होती है, चाहे सड़क पर कितना भी जलभराव क्यों न हो जाए।
पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता संजय कुमार तिवारी ने बंगलूरू में व्हाइट टॉपिंग वाली सड़कों को देखा है और वहां की तकनीक को समझा है। इसके बाद यहां इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया गया है। जलभराव वाले स्थलों पर आमतौर पर सीसी रोड बनाई जाती हैं, लेकिन अब व्हाइट टॉपिंग कराई जाएगी।
डामर की सड़कों से ढाई गुना अधिक लागत
व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें डामर की सड़कों के मुकाबले ढाई गुना अधिक लागत से बनती हैं। डामर के बेस पर केमिकल के साथ छह इंच कंक्रीट के साथ बिछाई जाती है। इस तकनीक का इस्तेमाल अभी तक दक्षिण भारत में नेशनल हाईवे पर किया जाता है, ताकि बार-बार मरम्मत की जरूरत न पड़े। अगर किसी डामर रोड को व्हाइट टॉप किया जाना है तो डामर की स्क्रैपिंग नहीं करनी पड़ती।
किला से सिटी स्टेशन और पीलीभीत रोड पर होगा काम
दो मार्गों पर जलभराव वाले स्थलों पर व्हाइट टॉपिंग कराने के निर्देश मुख्य अभियंता ने अधिशासी अभियंता को दिए हैं। किला से सिटी स्टेशन तक आई सड़क और पीलीभीत रोड पर व्हाइट टॉपिंग कराई जानी है। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
व्हाइट टॉपिंग डामर रोड के ऊपर होती है। इसमें मोटाई कम और उम्र ज्यादा होती है। सड़क पर पहले से जो डामर की मोटाई होती है, उसे हटाए बिना व्हाइट टॉपिंग करते हैं। आमतौर पर आबादी के जिस हिस्से में जलभराव होता है, वहां डामर की रोड टूटती हैं। इसलिए व्हाइट टॉपिंग की जरूरत महसूस की गई। -संजय कुमार तिवारी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी



