Bareilly News: सुस्त सिस्टम… सुविधाएं कम, कैसे रफ्तार भरें उद्यम
बरेली। भूमि का श्रेणीकरण बदलने में देरी से औद्योगिक विकास की रफ्तार मंद पड़ रही है। बहेड़ी में मेगा फूड पार्क के लिए बिजली सबस्टेशन नहीं बना। सड़कों की मरम्मत भी नहीं हुई। इसलिए नए उद्यमी आने से कतरा रहे हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) बरेली चैप्टर के मंथन में इसके साथ कई अन्य मुद्दे भी उठाए गए। उद्यमियों ने कहा कि यदि फूड इंडस्ट्री आने में समस्या है तो इसे सामान्य इंडस्टि्रयल एरिया में परिवर्तन कर सभी तरह की इंडस्ट्री के लिए जगह दी जाए।
उद्यमियों ने बताया कि 30 दिन में भूमि की श्रेणी बदले जाने का नियम है। देरी होने पर डीम्ड एनओसी जारी होती है, लेकिन इस पर बैंक लोन नहीं होता है। लोन के बिना इंडस्ट्री नहीं लग पाती। औद्योगिक विकास में यह बड़ी अड़चन है। चैप्टर चेयरमैन तनुज भसीन, सचिव मयूर धीरवानी, कोषाध्यक्ष रजत मेहरोत्रा, डिविजनल चेयरमैन विमल रिवाड़ी, डिविजनल सेक्रेटरी मनोज पंजाबी, सुरेश सुंदरानी, अभिनव कटरू, प्रियंक मूना आदि मौजूद रहे।
ये मांगें उठाईं
– महायोजना 2031 को मंजूर करें ताकि ग्राम रजऊ परसपुर व रहपुरा जागीर में औद्योगिक इकाइयां लगने का रास्ता साफ हो सके।
– महायोजना का गजट होने से पहले स्थापित उद्योगों को महायोजना के मानचित्र पर दर्शाया जाए।
– प्रस्तावित रिंग रोड भी नेशनल हाईवे का हिस्सा हो गया है। रहपुरा जागीर में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र व वेयरहाउसिंग जोन से रिंग रोड गुजारने को लेकर उद्यमियों से विमर्श किया जाए।
– परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के निकट रहपुरा जागीर की चकबंदी प्रक्रिया 20 वर्षों से लंबित है। स्थिति स्पष्ट की जाए।
– बीमार इकाइयों को वेयरहाउस में परिवर्तित करने की अनुमति मिले। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
उद्यमियों ने कहा कि अगर यूपीसीडा के क्षेत्र में लगी इंडस्ट्री उद्यमी के बेटे को विरासत में मिलती है तो उस पर भी दोबारा पंजीकरण की बाध्यता है। मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र के सामने भी उठाया गया था। अगर कोई उद्यमी अपनी फर्म बेटे के नाम करे या उसे फर्म में पार्टनर बनाए तो यूपीसीडा कोई शुल्क नहीं लेता, परंतु रजिस्ट्री फिर से कराता था। सरकार ने 2022 में इस प्रावधान को खत्म तो कर दिया, लेकिन काफी समय से इसकी मांग कर रहे लोगों को लाभ नहीं मिला। उनको भी लाभ मिलना चाहिए।
नगर निगम ने इंडस्ट्रीज के लिए टैक्स की कोई गणना नहीं थी। आवासीय क्षेत्र में लगने वाले टैक्स का तीन गुना टैक्स लगा दिया। इंडस्ट्री के प्लाॅट बड़े होते हैं, उनके लिए यह फार्मूला ठीक नहीं है। एमएसएमई नीति में होटल को इंडस्ट्रीज का दर्जा दिया गया है, लेकिन नगर निगम ने होटलों पर आवासीय क्षेत्र की गणना के अनुसार पांच से सात गुना तक टैक्स लगाया है। इसे कम किया जाए।


