Bareilly News: आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी व्रती महिलाएं
बरेली। लोक आस्था के पर्व छठ के दूसरे दिन शनिवार को व्रतियों ने खरना पूजन कर गुड़ की खीर बनाई। केले के पत्ते पर सिंदूर से अर्ध चंद्र की आकृति बनाकर दीप जलाया। पति और संतान के लिए अग्रासन निकालने के बाद प्रसाद ग्रहण किया। इसी के साथ महिलाओं ने 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत की। घर के सदस्यों के साथ मिलकर पूजन सामग्री तैयार की। रविवार शाम व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर संतान के लिए मंगलकामना करेंगी। रविवार को सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा।
शनिवार को पूरे दिन व्रती महिलाओं के घरों में छठी मइया के गीत सांझे बेरा देवो अरघिया मोरे मांगब आशीष…, पहिले पहिल हम कइनी छठी मैया बरत तोहार, करिहा क्षमा हे छठी मैया, भूल-चूक-गलती हमार… गूंजते रहे।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर स्थित श्री शिव-शक्ति पीठ मंदिर में देर शाम तक तालाब के आसपास रंग-बिरंगी झालरों को लगाने का सिलसिला चलता रहा। मंदिर की देखरेख करनेे वाले देवेंद्र राम ने बताया कि सजावट के लिए फूल मंगाए गए हैं। तैयारियां अंतिम चरण में हैं। साज-सज्जा को देखनेे के लिए आसपास के क्षेत्र के लोग भी आते रहे। फिलहाल तालाब में पानी नहीं भरा गया है, रविवार को इसे भरा जाएगा।
छठ पर्व सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। शहर में कई स्थानों पर सामूहिक छठ पूजा का आयोजन होता है। डोहरा रोड स्थित सुपर एन्क्लेव में रहने वाले स्थानीय लोग भी इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। वह चारों दिन पूजा में शामिल होते हैं। साथ ही परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देने भी जाते हैं। स्थानीय महिलाएं बताती हैं कि उनकी कॉलोनी में एक घर में ही छठ पर्व का आयोजन किया जाता है। छत पर बाथ टब रखकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। इसको लेकर सभी लोगों के यहां न्योता भेजा जाता है। संध्या को सभी कॉलोनीवासी छत पर एकत्रित होकर पूजा करते हैं।
कॉलोनी में एक घर में ही छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। मैं पांच सालों से इसमें शामिल हो रही हूं। वर्ष भर इस त्योहार का इंतजार रहता है। – सुषमा, गृहिणी
छठ पर्व की विधि विधान से पूजा होतेे देखना काफी सुखद होता है। व्रत तो नहीं रखते, मगर सभी मिलजुलकर त्योहार को मनाते हैैं। पर्व को लेकर हम सभी उत्साहित हैं। – अनीता, गृहिणी
छठ पर्व में तीन सालों से शामिल हो रही हूं। काफी अच्छा लगता है, मोहल्ले के सभी लोग एकत्रित होते हैैं। इससे सबसे मिलने-जुलने का भी समय मिल जाता है। ज्ञानती, गृहिणी
छठ पर्व के आयोजन में जाते हुए सात साल हो गए हैं। सूर्य भगवान को बच्चों से लेकर बड़े तक सभी लोग अर्घ्य देते हैं और मंगलकामना करते हैं। – महेश्वरी,गृहिणी



