Bareilly News: आवागमन रोकने के प्रस्ताव पर भड़के व्यापारी, जमकर हंगामा
बरेली। कुतुबखाना पुल के निर्माण के दौरान डेढ़ से दो महीने के लिए आवागमन ठप करने के सुझाव पर हंगामा खड़ा हो गया। व्यापारियों ने कार्यदायी संस्था मंटेना इंफ्रासोल पर धीमी रफ्तार से काम कराने का आरोप लगाया। वहीं, कार्यदायी संस्था और नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि आवागमन रोके बिना काम नहीं हो पाएगा।
व्यापारियों ने रात में काम कराने का सुझाव दिया। अफसर इससे सहमत नहीं हुए। बोले- जान की कीमत पर काम नहीं हो सकता। इस पर बैठक का बहिष्कार कर कुछ व्यापारी बाहर निकल गए। उन्हें फिर से बुलाया। बैठक बेनतीजा रही। अधिकारियों ने दोबारा बैठक बुलाने की बात कही है।हालांकि अभी इसका स्थान और तिथि तय नहीं है।
व्यापारी बोले- बैठक कभी भी हो पर उनके कारोबार का ख्याल रखा जाए। बाजार पूरी तरह बंद न कराया जाए। बृहस्पतिवार को दोबारा बैठक होने के आसार हैं। बैठक में सीओ प्रथम श्वेता यादव, अपर नगर आयुक्त सुनील यादव, सेतु निगम के जीएम केएन ओझा, उप परियोजना प्रबंधक अरुण कुमार गुप्ता तथा मंटेना इंफ्रासोल के एमके सिंह ने शामिल रहे।
विमर्श के बाद लिया जाएगा निर्णय
व्यापारियों की दिक्कतों को समझा। कार्यदायी संस्था ने काम को रफ्तार देने के लिए रास्ता ब्लाॅक करने की जरूरत बताई है। विचार-विमर्श करके निर्णय लेंगे। – केएन ओझा, महाप्रबंधक सेतु निगम
इस प्रस्ताव पर हुआ हंगामा
मशीनरी लाने-ले जाने के लिए 25 सितंबर से 31 अक्तूबर तक के लिए पिलर संख्या 19 ए से 26 तक जरूरत के समय आवागमन पर बंद किया जाए। 25 सितंबर से 31 अक्तूबर तक पिलर संख्या 26 से 30 और 35 से 40 के बीच आवागमन पूरी तरह रोका जाए। 30 नवंबर से 15 दिसंबर तक पिलर संख्या 38 से 43 तक और 19 से 26 तक पूरी तरह ब्लाॅक किया जाए।
व्यापारी बोले- बाजार बंद करने का सवाल ही नहीं
निर्माण के चलते पहले से ही ग्राहक कम आ रहे हैं। डेढ़ से दो महीने तक लगातार बाजार बंद करना संभव नहीं है। – अजय कुमार टंडन
रात में पुल का निर्माण कराएं, दिन में व्यापार होने दें। अन्यथा की स्थिति में यहां के व्यापारियों को क्षतिपूर्ति दी जाए। – वरजीत सिंह
हम पूर्ण रूप से दुकान बंद नहीं कर पाएंगे। बाजार से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। रात में काम कराएं। – उरविंदर सिंह
ऐसा तरीका अपनाएं कि निर्धारित समय पर काम भी पूरा जाए और स्थानीय लोगों का कारोबार भी प्रभावित न होने पाए। – डा. आलोक सक्सेना



