Bareilly News: गांवों तक पहुंचा पानी… फसलें डूबीं, रामगंगा में समाई 500 बीघा जमीन
बरेली। रामगंगा नदी के बढ़ता जलस्तर से किसानों और ग्रामीणों में दहशत बढ़ने लगी है। फरीदपुर क्षेत्र में हजारों बीघा फसलें डूब चुकी हैं। बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंच रहा है। सड़कें व पुल क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। फतेहगंज पश्चिमी में 500 बीघा जमीन नदी में समा चुकी है। जलस्तर चेतावनी बिंदु छूने को बेताब है। बाढ़ की आशंका के मद्देनजर केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से रामगंगा नदी के प्रवाह वाले बरेली समेत आठ जिलों में अलर्ट जारी हुआ है। बाढ़ चाैकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के लखनऊ स्थित केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से जारी अलर्ट के मुताबिक मुरादाबाद में रामगंगा नदी का जलस्तर मंगलवार रात 11 बजे खतरे के निशान को पार कर गया है। इससे आगामी दो से चार दिनों में बरेली में भी नदी का जलस्तर बढ़ेगा। लिहाजा, स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। बाढ़ खंड के एसडीओ अमित किशोर के मुताबिक रामगंगा नदी का जलस्तर शाम चार बजे 161.4 मीटर गेज दर्ज किया गया। खो और किच्छा बैराज से छोड़े गए 1.28 लाख क्यूसेक पानी की वजह से अभी तीन दिनों तक जलस्तर में वृद्धि होगी।
रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के खल्लपुर, कादरगंज, रायपुरहंस, गोविंदपुर, गुजरगौटिया, कपूरपुर गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। हजारों बीघा फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो रही हैं। किसानों ने राहत व बचाव के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। कादरगंज के प्रधान राकेश कश्यप के मुताबिक अभी नदी उफान पर है। जलस्तर और बढ़ा तो बाढ़ का पानी गांव में घुस जाएगा। कल्लपुर गांव के पूर्व प्रधान के मुताबिक नदी के बढ़ते जलस्तर से दातागंज से जोड़ने वाले पुल का संपर्क क्षतिग्रस्त हो गया है। किसानों की जमीन का कटान रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है।
जलस्तर बढ़ने से गांव गौतारा, प्रेमपुर गौटिया की 500 बीघा जमीन कटकर रामगंगा नदी में समा गई। दोनों गांव के बीच का संपर्क मार्ग भी टूट गया। ग्रामीणों की गुहार पर सांसद संतोष गंगवार ने बाढ़ खंड के अफसरों को पत्र लिखा था पर पांच दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण मिश्रीलाल, जयपाल, शिवनंदन, मोहनलाल, मनोहर, जसपाल, महाराज सिंह, तुलसी कुमार, रामपाल, छोटेलाल की जमीन नदी में समाई है। प्रधान पंकज गंगवार ने कहा कि वह फिर सांसद से मिलकर राहत व बचाव के इंतजाम कराने के लिए कहेंगे। बताया कि सिंचाई और जल संसाधन विभाग ने 88.52 लाख रुपये की लागत से ठोकरों का निर्माण कराया था जो पिछले साल की बारिश में ही बह गए थे। अब जलस्तर बढ़ने पर गांव में खेतों का कटान शुरू हो गया है। संवाद
तिरपाल के नीचे लेनी पड़ी शरण
मीरगंज। रामगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर ग्रामीणों में दहशत है। ग्राम पंचायत अम्बरपुर के मजरा तीरथनगर में कई घरों में भी पानी घुसने से ग्रामीण तिरपाल में रहने को विवश हैं। प्रकोप से बचने के लिए ग्रामीणों ने रामगंगा के किनारे पर श्रीमद्भागवत कथा शुरू की पर पंडाल में पानी भर गया।
गांव के रंजीत सिंह ने बताया कि जलप्रवाह से गांव के गुरुद्वारे और प्राथमिक विद्यालय में कटान हो चुका है। तीरथनगर के बूटा सिंह, लक्ष्मण सिंह, सोहन सिंह, बलबीर सिंह, हरनेक सिंह, तारा सिंह, सोनू सिंह, पिपेन्द्र सिंह अब रौतापुर के जंगल में तिरपाल डालकर रह रहे हैं मगर तहसील प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है। गोरा हेमराजपुर में रामगंगा नदी पर बने पुल के पास अप्रोच रोड का कटान भी होने लगा है। प्रधान धर्मेन्द्र सिंह ने 500 बीघा जमीन के कटान की आशंका जताई है। प्रमोद ने बताया कि बुधवार सुबह पानी में फंसी दो गायों को ट्यूब की मदद से बाहर निकाला गया।
रामगंगा नदी का तटबंध टूटने से किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। अब गांव में पानी घुसने लगा है। बुधवार को एसडीएम गोविंद मौर्य रामगंगा किनारे झाला बनाकर रह रहे किसानों से मिले और जलप्रवाह का निरीक्षण किया। लोगों से पानी में न जाने की अपील की। बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिए जाने का आश्वासन दिया। अब तक गांव के लालता प्रसाद मौर्य, गंगाराम, राजवीर, जागन लाल व अन्य किसानों की फसलें जलमग्न हाे चुकी हैं।



