बरेली

Bareilly News: समय से पहले ही बंद हुए गेहूं क्रय केंद्र

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आंवला/ फरीदपुर। गेहूं खरीद के लिए इस बार शासन की ओर से 15 जून तक का समय तय किया गया था। इससे पहले ही जिले के ज्यादातर क्रय केंद्रों पर ताला लटक चुका है। गेहूं की आवक में आई कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र में बने ज्यादातर क्रय केंद्रों पर काफी पहले ही खरीद बंद की जा चुकी है। जो किसान अपना गेहूं एमएसपी पर बेचना भी चाह रहे हैं, क्रय केंद्र बंद होने से उन्हें भी भटकना पड़ रहा है।

बहेड़ी मंडीयार्ड में गेहूं खरीद के लिए चार क्रय केंद्र बनाए गए थे। बृहस्पतिवार को यहां नैफेड और पीसीयू का खरीद केंद्र बंद मिला। फरीदपुर के गांव रजऊ परसपुर में साधन सहकारी समिति पर बने केंद्र पर भी ताला लटका हुआ था। आंवला मंडी में बने खाद्य विपणन विभाग के दो क्रय केंद्रों सहित अन्य जगह भी खरीद का यही हाल नजर आया। जिन क्रय केंद्रों पर स्टाफ मौजूद था वहां भी किसान नहीं पहुंच रहे थे। क्रय केंद्र प्रभारियों ने बताया कि पिछले कई दिनों से एक भी किसान गेहूं लेकर नहीं आया है।

जिले में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई है। 2125 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का समर्थन मूल्य तय किया था। इस बार शुरूआत से ही बाजार में गेहूं का मूल्य ठीक रहा। 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक गेहूं खरीदा गया। इस वजह से किसान सरकार क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने पहुंचे ही नहीं।

लक्ष्य के सापेक्ष 1.76 प्रतिशत हुई खरीद

किसानों के न आने से इस बार जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया। जिले में 1.80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था। अब तक सिर्फ 31750 क्विंटल गेहूं की खरीद ही हुई है। यह लक्ष्य का सिर्फ 1.76 प्रतिशत है। गेहूं खरीद में प्रदेश में जिले का 22वां स्थान है। 15 जून को खरीद बंद हो जाएगी। ऐसे में लक्ष्य पूरा होने के आसार भी नहीं हैं।

मोबाइल क्रय केंद्र भी रहे नाकाम

गेहूं खरीद बढ़ाने के लिए खाद्य विपणन विभाग की ओर से मोबाइल क्रय केंद्र बनाए गए। इनके जरिये गांव-गांव जाकर खेत और घरों से गेहूं खरीदना था। बाजार में अच्छा मूल्य मिलने की वजह से किसानों ने मोबाइल क्रय केंद्रों पर भी गेहूं नहीं बेचा।

उत्तराखंड जा रहा गेहूं

बहेड़ी। उत्तराखंड में बिस्किट की कई फैक्टरी हैं। इन फैक्टरी संचालकों ने इस बार महंगे दाम पर गेहूं की खरीद की। उत्तराखंड से सटे बहेड़ी के ज्यादातर गांव के किसानों ने अपना गेहूं इन फैक्टरियों के लिए बेच दिया। समर्थन मूल्य से 200 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मूल्य पर बिस्कुट फैक्टरी संचालकों ने गेहूं खरीदा।

वर्जन:

बाजार में अच्छा मूल्य मिलने की वजह से इस बार ज्यादातर किसानों ने अपना गेहूं खुले बाजार में बेच दिया। इस वजह से लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका। 15 जून तक क्रय केंद्र खोलने के निर्देश दिए गए हैं। – कमलेश पांडेय, डिप्टी आरएमओ


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