बरेली के कुतुबखाने: यहां हाथों में मोबाइल नहीं, किताबें मिलेंगी; आप भी हैं पढ़ने के शौकीन तो चले आइए

लाइब्रेरी में किताबें पढ़ते युवा
– फोटो : अमर उजाला
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किताब…कई पन्नों के साथ एक लंबे अनुभव को खुद में सहेजे हुआ एक ऐसा आईना है, जिसमें देखकर हर शख्स खुद को संवार सकता है, लेकिन बदलते वक्त के साथ किताब की जगह मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे उपकरणों ने ली है। बावजूद इसके आज भी बरेली के कुतुबखानों यानि पुस्तकालयों में लोगों की अच्छी खासी भीड़ रहती है।
कैंट स्थित युग्वीणा लाइब्रेरी, जिला पुस्तकालय में कई लोग अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ये लाइब्रेरी आज भी सफल हैं। इसकी बड़ी वजह है कि वक्त के साथ प्रबंधन ने इन्हें अपडेट किया। रख-रखाव बेहतर रखा। नए लेखकों की किताबों को जगह दी।
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जिला पुस्तकालय की प्रभारी श्वेता बताती हैं कि काफी लोग किताबें पढ़ने नियमित आते हैं। पूरा-पूरा दिन रहकर पढ़ते हैं। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले ज्यादा रहते हैं। कई लोग साहित्य को भी पढ़ना पसंद करते हैं। लोग पुराने लेखकों के बजाय नए को पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसी लाइब्रेरी लोगों की पसंद रहती हैं, जिनमें वक्त के साथ नई रचनाएं, संपादित लेख शामिल किए जाते रहें।


