बदायूं

Budaun News: जेल में मानसिक रोगी बंदी 11, आठ एचआईवी पॉजिटिव भी

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11 mentally ill prisoners in jail, eight also HIV positive

जिला कारागार बदायूं। संवाद

– जिला अस्पताल में 12 बंदियों का चल रहा है उपचार

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। जेल में बंदियों के बीमार होने और ठीक होने का सिलसिला लंबे समय से जारी है। हर समय दो-चार बंदी जिला अस्पताल से लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहते हैं, लेकिन कुछ समय से जेल में मानसिक रोगी बंदियों की संख्या भी बढ़ी है। अब इनकी संख्या बढ़कर 11 तक पहुंच गई है। उनका बरेली के मानसिक रोग चिकित्सालय से उपचार चल रहा है। आठ बंदी एचआईवी पॉजिटिव ग्रसित भी हैं।

जेल में इस समय करीब एक हजार बंदी हैं। उनमें करीब 220 सजायाफ्ता और करीब 820 विचाराधीन हैं। कोरोना काल से बंदियों के स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत जेल में कई नियम भी लगाए गए। एक बार को उनकी मिलाई पर पाबंदी भी लगा दी गई थी।

हालांकि इस समय कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन उनसे मिलने का समय और नियम जरूर लागू है। अगर बंदियों में बीमारी की बात करें तो इस समय 12 बंदी जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें अलग-अलग बीमारियां हैं। दो बंदियों का जिले से बाहर उपचार चल रहा है। पांच बंदियों को टीबी रोग है, तो वहीं आठ बंदी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इनके अलावा 11 मानसिक रोगी हैं।

तीन साल पहले जेल में मानसिक रोगी बंदियों की संख्या पांच-छह थी, लेकिन तब से इनकी संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई है। इसकी वजह बताई जा रही है कि वह अकेलापन महसूस कर रहे हैं। जेल के नियम कायदे को महसूस कर रहे हैं, जिससे वह मानसिक रोग से गृसित हो रहे हैं। हालांकि सभी का बरेली के मानसिक रोग चिकित्सालय से उपचार चल रहा है। समय-समय पर उन्हें बरेली ले जाया जाता है। जहां से उन्हें दवा दिलवाई जा रही है।

जेल के सभी मानसिक रोगी बंदियों का बरेली के मानसिक रोग चिकित्सालय से उपचार चल रहा है। समय-समय पर उन्हें डॉक्टर को दिखाया जाता है। उन्हें दवा आदि भी दिलवाई जाती है। उन्हें ठीक कराने की कोशिश की जा रही है।- डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक

जेल में बंदी अपने आपको अकेला महसूस करते हैं। वह समझते हैं कि वह यहां आकर फंस गए हैं। अब वह कुछ नहीं कर सकते। वह अपने परिवार के बारे में सोचते हैं। उनके मन में तरह-तरह के ख्याल आते हैं। इससे वह मानसिक रोग के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें लगातार थेरेपी और उपचार की आवश्यकता है। -डॉ. सर्वेश दास, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट


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