Budaun News: जिला जेल में 30 फीसदी घटे कैदी-बंदी, फिर भी क्षमता से दोगुने

जिला कारागार बदायूं। संवाद
– अब भी क्षमता से ज्यादा हैं जेल में निरुद्ध बंदी और कैदी, वर्ष 2017 में रही सबसे अधिक संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले के थानों में दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या भले ही लगातार बढ़ रही है लेकिन पिछले कुछ समय से जेल में कैदियों और बंदियों की संख्या में कमी आई है। अपनी क्षमता से तीन गुना ज्यादा तक भार उठाने वाली जेल में इस समय कुछ राहत है। पिछले दो-तीन वर्षों में करीब 30 फीसदी कैदियों और बंदियों की संख्या घटी है। वर्तमान में यहां एक हजार बंदी और कैदी हैं। हालांकि फिर भी क्षमता के मुकाबले यह संख्या अधिक है।
बदायूं जेल की क्षमता 529 कैदियों व बंदियों की है लेकिन यहां हमेशा तीन गुना से ज्यादा कैदी और बंदी रहे हैं। वर्ष 2015-16 तक कभी भी यहां कैदियों और बंदियों की संख्या 1500-1600 से कम नहीं रही। वर्ष 2017 में इनकी संख्या बढ़कर दो हजार से ज्यादा तक पहुंच गई थी। बैरकों में कैदियों और बंदियों के लिए रहने की जगह तक नहीं बची थी।
उस दौरान जेल में कई बड़ी घटनाएं हुईं। मारपीट के कई मामले सामने आए तो दो कैदियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत भी हो गई थी। विभागीय जांच भी हुई। कई कैदियों और बंदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया गया। कई मामलों में सख्ती बरती गई। तब कहीं जेल में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकी। फिलहाल अब हालात में कुछ सुधार आया है। इस समय यहां बंदियों और कैदियों की संख्या 1000 के करीब है।
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संभल जिला बनने के बाद से घटी संख्या
वर्ष 2011 से पहले बदायूं जिले में आने वाले क्षेत्र गुन्नौर, धनारी और रजपुरा काफी संवेदनशील रहे। बदायूं जेल में इन्हीं थाना क्षेत्रों के कैदियों और बंदियों की संख्या ज्यादा रहती थी। संभल जिला सितंबर 2011 में बनाया गया। इसका नाम भीमनगर रखा गया था लेकिन बाद में बदलकर संभल कर दिया गया। उसके बाद संभावित इलाकों के कैदी और बंदी जिला कारागार में आना कम हो गए।
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दो साल में तीन सौ कैदी किए गए शिफ्ट
वर्ष 2021 से लेकर अब तक करीब तीन सौ कैदियों को शिफ्ट किया जा चुका है। जिसमें आठ माह में ही 40-50 कैदियों और बंदियों को शिफ्ट किया गया। जुलाई में भी 23 कैदियों को बरेली शिफ्ट किया गया है।
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जेल में 529 कैदी और बंदी रखे जा सकते हैं। इस समय यहां करीब एक हजार कैदी और बंदी हैं। इसकी वजह यह भी है कि सात साल से नीचे की सजा वाले अपराधियों को अब जेल नहीं भेजा जा रहा है।
– डॉ. विनय कुमार, जेल अधीक्षक



