बदायूं

Budaun News: निलंबन के बाद अब एसडीएम पर विभागीय कार्रवाई की लटकी तलवार

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बदायूं। राज्यपाल को समन भेजकर कोर्ट में तलब करने के मामले में सदर तहसील के एसडीएम न्यायिक विनीत कुमार और पेशकार बदन सिंह को निलंबित किया जा चुका है। अब इस मामले की विभागीय जांच की जा जाएगी। शासन स्तर से समिति बनाकर आगे की कार्रवाई होगी।

गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन के अधिग्रहण के एक मामले में एसडीएम न्यायिक विनीत कुमार की कोर्ट की तरफ से सात अक्तूबर को राज्यपाल के नाम समन जारी कर उन्हें 18 अक्तूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया था। जब समन राजभवन पहुंचा तो राज्यपाल के विशेष सचिव बद्रीनाथ सिंह ने 16 अक्तूबर को डीएम को पत्र भेजकर भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी।

मामला सुर्खियाें में आने पर शासन ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की। इसके बाद डीएम मनोज कुमार ने एसडीएम के पेशकार बदन सिंह की गलती मानते हुए निलंबित कर दिया, साथ ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी। एसडीएम न्यायिक विनीत कुमार को शासन स्तर से निलंबित कर दिया गया। डीएम ने बताया कि अब इस घटना की विभागीय जांच शासन स्तर से गठित टीम द्वारा की जाएगी। उसकी जांच आख्या के आधार आगे की कार्रवाई शासन से ही होगी।

ऐसे हुआ राज्यपाल का नाम शामिल

गंगा एक्सप्रेस-वे में जिले के कई किसानों की जमीन शामिल हुई है। इसके बाद संबंधित किसानों की ओर से ””राज्यपाल द्वारा लोक निर्माण विभाग”” के नाम अपनी जमीन दी जा रही है। उस जमीन का बैनामा जिला मजिस्ट्रेट के यहां से नामित अधिकारी द्वारा कराया जाता है। बाद में संबंधित किसान को धनराशि दी जाती है। ऐसे में जब वादी चंद्रहास ने यह जमीन वापस मांगी तब समन पर विपक्ष के तौर पर ””राज्यपाल द्वारा लोक निर्माण विभाग”” डाला जाना था और इसमें लोनिवि के नाम समन जारी होना था, लेकिन ऐसा न होकर राज्यपाल को समन जारी कर दिया गया।

यह था मामला

सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के लोड़ा बहेड़ी निवासी चंद्रहास का कहना था कि उसकी चाची कटोरी देवी की कुछ जमीन रिश्तेदारों ने अपने नाम करा ली थी। इसके बाद इस जमीन को लेखराज नाम के व्यक्ति को बेच दिया। इसी जमीन के कुछ हिस्से को बाद में सरकार ने अधिग्रहीत कर लिया था। इसके लिए लेखराज को 12 लाख रुपये मुआवजा भी मिला था। बाद में चंद्रहास ने एसडीएम न्यायिक कोर्ट में वाद दायर कर उसी जमीन के खसरा खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने की मांग की। इसी याचिका की सुनवाई के मामले यह समन भेजा गया।


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