बदायूं

Budaun News: नाराज ग्रामीणों ने मनरेगा पार्क में बंद किए पशु

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Angry villagers locked animals in MNREGA park

युसूफनगर गांव में के पार्क में बंद किए गोवंश। संवाद

बाद में सचिव ने सभी पशुओं को अस्थायी गोआश्रय स्थल भिजवाया

गोआश्रय स्थल बनाने में अव्वल, फिर भी भटक रहे गाेवंश

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं/कुंवरगांव। प्रदेश में गोआश्रय स्थल बनाने में जिला टॉप फाइव में शामिल है। इसके बावजूद खेतों से लेकर सड़कों तक छुट्टा गोवंश यहां-वहां घूमते देखे जा सकते हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार सुबह यूसुफनगर के किसानों ने छुट्टा गोवंशों को मनरेगा द्वारा बनाए गए पार्क में बंद कर दिया। हालांकि बाद में दोपहर बाद उन्हें गोआश्रय स्थल में भिजवा दिया गया।

शासन ने छुट्टा गोवंशों की स्थिति को देखते हुए पिछले साल जिले में ज्यादा से ज्यादा गोआश्रय स्थल बनाए जाने पर जोर दिया था, जिसके बाद में प्रशासन ने सभी प्रधानों और सचिवों को ग्राम पंचायत की खाली पड़ी जगहों पर गोआश्रय स्थल बनाने के निर्देश दिए। प्रशासन की सख्ती के चलते कुछ प्रधानों और सचिवों ने औपचारिकता के लिए गोआश्रय स्थल बनाए। ऐसे में जिले में कई गोआश्रय स्थल खुल गए।

आंकड़ो की बात करें तो जिले में इस समय 237 गोआश्रय स्थल हैं, लेकिन गोवंशों की स्थिति जस की तस है। अधिकतर पशु सड़कों पर ही घूमते देखे जा सकते हैं जो किसानों की फसल भी नष्ट कर देते हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार को कुंवरगांव क्षेत्र के गांव यूसुफनगर के ग्रामीणों ने खेतों में फसलों को खराब करने वाले छुट्टा गोवंशों को पकड़कर मनरेगा द्वारा बनाए गए एक पार्क में बंद कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि गांव में नाम के लिए गोआश्रय स्थल बना है। वहां पर भी क्षमता से कम गोवंश रखे गए हैं, जबकि खेतों से लेकर सड़कों तक तमाम गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं जो फसलों को खराब कर रहे हैं। बाद में सचिव आदिल रशीद ने पार्क में बंद गोवंश को गांव में बने अस्थायी गोआश्रय स्थल भिजवाया। गांव वालों से वार्ता की। बोले-अगर कोेई सहभागिता योजना के तहत गोवंश लेना चाहते हैं, तो अपना नाम लिखवा दे, ताकि उच्चधिकारियों से वार्ता कर उनको गोवंश दिया जा सके।

पहले भी बंद किए जा चुके हैं गोवंश

जिले में गोवंश को पकड़कर बंद करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। पिछले साल 30 दिसंबर को कछला नगर पंचायत कार्यालय में लोगों ने पशुओं को बंद कर दिया था तो इस साल एक जनवरी को मौसमपुर के सरकारी स्कूल में पशु बंद कर दिए गए थे। चार जनवरी को गुलड़िया के पंचायत घर में ग्रामीणों ने पशुओं को बंद कर दिया। इसी दिन जगत के काजी सोहरा के पंचायत घर में भी गाेवंशीय पशु बंद कर दिए गए। इसी क्रम में रायपुर और पड़ौलिया के प्राथमिक स्कूल, दातागंज के कुंडरा मंजरा, दहगवां के रसूलपुर कला, करियामई जगत के नरऊ बुजुर्ग, रसूलपुर बिलहरी में भी गोवंशीय पशुओं को बंद किया गया। कई मामलों में तो पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था।

यूसुफनगर में एक अस्थायी गोआश्रय स्थल संचालित है। उसकी क्षमता 50 पशु रखने की है। वहां 35 से 40 गोवंश रह रहे हैं। वहां पर क्षमता से ज्यादा गोवंशों का रख जाना मुश्किल है। इस मामले भी ग्रामीणों से वार्ता की गई है।

– डॉ. एनएस मलिक, सीवीओ

युसूफनगर गांव में के पार्क में बंद किए गोवंश। संवाद

युसूफनगर गांव में के पार्क में बंद किए गोवंश। संवाद


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