Budaun News: बरेली के किशोर कांवड़िया की हालत बिगड़ी, अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम

उझानी में बेटे देव की मौत के बाद बदहवास पिता धर्मेंद्र सोनकर। संवाद
दो-तीन दिन से से थी तबियत खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी (बदायूं)। कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रक सवार बरेली निवासी किशोर कांवड़िया देव सोनकर की हालत बिगड़ गई। साथी शिवभक्त उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचते, उससे पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। सूचना के बाद अस्पताल पहुंचे मृतक के परिजन पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर शव अपने साथ ले गए।
मृतक देव सोनकर (14) बरेली जिले में चनहेटी इलाके में लाल फाटक के पास रहने वाले मीट विक्रेता धर्मेंद्र सोनकर का पुत्र था। वह शुक्रवार शाम को अपने इलाके के कांवड़ियों की टोली के साथ ट्रक से कछला गंगाघाट पर पहुंचा। सुबह में उनकी टोली कांवड लेकर गंगाघाट से निकली तो रास्ते में बुटला के पास देव की हालत बिगड़ गई। वह ट्रक में बैठा था। कांवड़ियों की टोली ट्रक के पीछे चल रही थी। हालत बिगड़ने पर साथी शिवभक्तों और कुनबे के युवकों ने बुटला बोर्ड पर उसे निजी क्लीनिक पर दिखाया, लेकिन वह बेहोश की हालत में चला गया।
एंबुलेंस के जरिये देव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाया गया। चिकित्साधिकारी डॉ. हरीश कुमार ने पहले ही मृत घोषित कर दिया। डॉ. कुमार ने बताया कि देव की तबियत पहले से ही खराब थी। उसके परिजनों ने भी यही बताया है। दोपहर में बरेली से रोते-बिलखते आए देव के पिता ने बताया कि तीन दिन पहले उसने बुखार आने पर दवा भी ली थी। कुनबे के लोग कांवड़ के लिए निकले तो देव भी उनके साथ हो गया। मृतक के पिता से एसएसआई सुमित कुमार ने जानकारी की। पिता धर्मेंद्र ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। बाद में धर्मेंद्र के साथ परिवार के लोग शव लेकर चले गए। शव के लिए पुलिस ने निजी वाहन की व्यवस्था भी कराई।
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सरेबाजार गिरा युवक बेहोश
कोतवाली क्षेत्र के गांव बिहाार हरचंद निवासी 40 वर्षीय प्रेम कुमार पुत्र प्यारे लाल शनिवार दोपहर दवा लेने के लिए निजी चिकित्सक के पाया आया। इसके बाद उसने मेडिकल स्टोर से दवा भी खरीदी। दवा खरीदकर प्रेम अपनी बाइक स्टार्ट करता, उससे पहले ही वह गश खाकर सड़क पर गिर पड़ा। बेहोशी हालत में राहगीरों ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचाया। बाद में उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

उझानी में बेटे देव की मौत के बाद बदहवास पिता धर्मेंद्र सोनकर। संवाद