Budaun News: टूटी सड़कें, अंधे मोड़… जिम्मेदारों ने तो बंद कर लीं आंखें, आप खुली रखिए

उसावां में सड़क के बीच में गड्ढा। संवाद
बदायूं। जिले में तमाम सड़कें टूटी हैं। गहरे गड्ढे जानलेवा बने हुए हैं। अंधे मोड़ आए दिन लोगों की जिंदगी लील रहे हैं। हादसे होते रहते हैं पर जिम्मेदारों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। बड़ा हादसा होने पर जांच की खानापूर्ति की जाती है। दो-चार दिन बड़े अफसर मातहतों को खूब दौड़ाते हैं। लगता है अब शायद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी, लेकिन सुधार नहीं होता। न टूटी सड़कों का, न मौतोंं का सबब बन रहे गड्ढों का और न ही अंधे मोड़ों का। अधिकारी आंखें बंद करके बैठे रहते हैं। ये हालात तब हैं जब मुख्यमंत्री दिवाली से पहले सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का आदेश दे चुके हैं।
जिले में हर साल सड़क हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है, उसी अनुपात में मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। करीब चार-पांच सौ लोग हर साल घायल होते हैं और करीब तीन सौ लोग जान गंवाते हैं। घायलों में तमाम अपंग हो जाते हैं। हर हादसे पर वाहन चालक को दोष दे दिया जाता है लेकिन यह हादसे क्यों होते हैं, कहां होते हैं, कभी इस पर गौर नहीं किया जाता। हर साल दिखावे के तौर पर ब्लैक स्पॉट भी चिह्नित होते हैं। वहां मरम्मत की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को दे दी जाती है। साल के आखिर में पता चलता है कि सारे ब्लैक स्पॉट समाप्त कर दिए गए हैं। वहां सुधार करा दिया गया है लेकिन यह सारे काम सिर्फ कागजों में होते हैं।
सड़क हादसे होते रहते हैं और किसी की नींद नहीं टूटती। जिले में ऐसे बहुत से स्थान आज भी चिह्नित हैं, जहां लगातार कई वर्षों से हादसे हो रहे हैं और लोग अपनी जान गवां रहे हैं। टूटी सड़कें और गड्ढों से लोगों का बुरा हाल है। कई इलाकों में ऐसे तीव्र मोड़ हैं, जहां न तो कोई बोर्ड लगा है और न ही संकेतक लगाए गए हैं, जिससे हादसों को रोका जा सके।
तीन साल में 874 लोगों ने गंवाई जानतीन साल में हुए सड़क हादसों की बात करें तो 2021 में 403 हादसे हुए थे। इनमें 292 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2022 में 458 हादसों में 299 लोगों ने जान गंवाई और इस साल अब तक 470 हादसे हो चुके हैं। इनमें 283 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसों का यह आंकड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं। उन ब्लैक स्पॉट पर लगातार हादसे क्यों हो रहे हैं, इसके लिए उन्होंने क्या किया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
डिवाइडर पर थोपे उपले, अफसर बेखबर
उझानी। सड़क हादसों की संख्या में इजाफा होने के बाद भी अफसरों की नजर वाहन चालकों को होने वाली दिक्कतों की तरफ नहीं जाती। सड़क के डिवाइडर पर उपले थोपकर आसपास गांवों की महिलाओं ने ढेर लगा रखे हैं। ऐसा ही नजारा दिल्ली हाईवे पर बदायूं और उझानी, उझानी से सहसवान तक देखने को मिल जाता है। उपलों की वजह से खासकर मोड़ पर चालक दूसरी तरफ निकल पड़ने वाले छुट्टा पशुओं को नहीं देख पाते। अक्सर कार और टेंपो हादसे का शिकार हो जाते हैं।
पिछले महीने नगर निवासी हरिओम ने इसकी शिकायत पीडब्ल्यूडी के जेई से की थी, लेकिन उन्होंने भी हकीकत पर गौर करने की जरूरत महसूस नहीं की। इसके अलावा बरेली-मथुरा हाईवे और दिल्ली हाईवे पर चार पांच ब्लैक स्पॉट खतरनाक साबित हो रहे हैं। बदायूं से निकलते ही पहला ब्लैक स्पॉट जिरौली मोड़ के पास बन गया है। तीन-चार मौतेंं भी हो चुकी हैं, लेकिन सड़क किनारे संकेतक नहीं लगा है। संकेतक के अभाव में वाहन चालकों समेत राहगीर हादसे की चपेट में आ जाते हैं।
बराही मोड़ पर तालाब में गिरते हैं वाहन
दातागंज। दातागंज-बरेली रोड पर बराही गांव के पास एक ऐसा मोड़ है, जहां अक्सर हादसे होते हैं। जरा भी असंतुलित होने पर वाहन सीधा तालाब में जाकर गिरता है। अब तक कई वाहन उसमें गिर चुके हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है। पिछले कई साल से इसकी शिकायतें होती आ रहीं हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं म्याऊं रोड पर घिलौर के पास पुलिया भी जानलेवा बन गई है। गनगोला के पास पुलिया और पापड़ में ब्रहमदेव मंदिर हादसा स्थल बन गए हैं। यह ब्लैक स्पॉट भी घोषित हैं। सुधार के नाम पर एक बोर्ड तक नहीं लगा है।
म्याऊं-बदायूं रोड के गड्ढों से नए वाहन हो गए खटारा
म्याऊं। म्याऊं-बदायूं रोड के हालत सबसे ज्यादा खराब हैं। इस सड़क पर हजारों गड्ढे हैं। जगह-जगह सड़क टूटी हुई है। पिछले कई साल से लोग इस मुसीबत को झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि इस रोड पर चलन वाले नए वाहन तक पिछले छह माह में खटारा हो गए। इसके बावजूद सड़क का निर्माण नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि इसके लिए निर्माण के लिए बजट भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई है। वहीं वजीरगंज कस्बे में मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे की सड़क तो काफी ऊंची है लेकिन उसकी पटरी नीची है। कभी-कभी पटरी से सड़क पर चढ़ना मुश्किल हो जाता है। अक्सर बाइक सवार हादसे के शिकार हो जाते हैं। उन्हें ओवरटेक करने वालों से बचना तक मुश्किल हो जाता है।
वर्जन- बाद में

उसावां में सड़क के बीच में गड्ढा। संवाद

उसावां में सड़क के बीच में गड्ढा। संवाद

उसावां में सड़क के बीच में गड्ढा। संवाद

उसावां में सड़क के बीच में गड्ढा। संवाद