बदायूं

Budaun News: मोबाइल फोन की कॉल रिकॉर्डिंग समेत सीडीआर से गुत्थी सुलझने के आसार

Connect News 24

उझानी (बदायूं)। मेंथा व्यापारी संजय गुप्ता उर्फ अप्पू की आत्महत्या के मामले में अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आने से उनके परिजनों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। व्यापार के सिलसिले में कई बड़े लोगों से अप्पू के लेनदेन के बारे में परिजनों को कुछ जानकारियां हैं जरूर, लेकिन वह फिलहाल उसे सामने लाना नहीं चाहते। अप्पू के पास तीन मोबाइल फोन थे और तीनों में कॉल रिकाॅर्डिंग भी एक्टिव थी। ऐसे में काफी हद तक संभव है कि कॉल रिकार्डिंग और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने में अहम साबित हो।

पुरानी अनाज मंडी निवासी अप्पू गुप्ता का शव एक मई की दोपहर उन्हीं के बदायूं स्थित कमरे में खून से लथपथ पड़ा मिला था। शव से बरामद डायरी के एक पन्ने पर लिखे सुसाइड नोट ने व्यापारियों पर करोड़ों रुपये बकाया होने का जिक्र सामने आ गया था। सुसाइड नोट में बरेली के मनीष जैन, मनोज, संभल जिले में चंदौसी के अंशुल, उझानी के ऐश्वर्य बंसल और अनुभव शर्मा, बदायूं शहर के अजय मथुरिया का नाम शामिल बताया जा रहा है।

पिता महेंद्र गुप्ता अभी भी आत्महत्या को लेकर संशय में हैं। उन्होंने बताया कि हकीकत पुलिस की जांच में ही सामने आएगी। उनके बेटे के तीनों मोबाइल फोन में कॉल रिकार्डिंग थी। तीनों मोबाइल पुलिस के पास हैं। तीनों मोबाइल ही राज खोल सकते हैं। उनकी तीन डायरियां भी पुलिस के पास हैं। इसके विपरीत सीडीआर से भी काफी हद तक गुत्थी सुलझाने का मौका पुलिस को मिल जाएगा। ऐसा भी नहीं कि अप्पू ने आत्मघाती निर्णय अचानक ही ले लिया हो। अगर किसी ने उसे धमकाया था तो कॉल रिकार्डिंग हकीकत बयां कर देगी।

बताते हैं कि अप्पू उस दिन सुबह जब घर से निकले तो सामान्य थे। अगर कोई दिक्कत होती तो किसी परिजन या फिर व्यापारिक करीबी को जरूर बताते। अप्पू को उस दिन किसी ने धमकाया या फिर कुछ और हुआ, यह भी जांच का विषय है। इसके विपरीत, मृतक के परिजनों को लेनदेन के बारे में कुछ और जानकारियां भी हैं। मसलन, पिछले दिनों म्याऊं के एक व्यापारी से अप्पू ने उधारी के रुपये मांगे तो मनमुटाव हो गया था। उसका फैसला कछला में हुआ था। रकम करीब 70 लाख रुपये की बताई गई थीं।

गायब है व्यापारी अप्पू का लैपटॉप

मेंथा व्यापारी संजय गुप्ता बदायूं के अलावा कासगंज जिले के सोरों में भी व्यापार किया करते थे। निजी कार से वह दोनों में जिस स्थान पर जाते, साथ में रिवाल्वर के अलावा लैपटॉप जरूर होता था। पिता महेंद्र गुप्ता कहते हैं कि घटना वाले दिन जब अप्पू ने उनका फोन रिसीव नहीं किया तो वह अपने करीबी के साथ बदायूं पहुंच गए थे। कमरे में बेटे का शव पड़ा देखा तो पुलिस को फोन कर बुला लिया था। कमरे में खाली बैग तो मिला, लेकिन लैपटॉप नहीं मिला। लैपटॉप में लेनदेन का हिसाब भी रहता था। घटना में आत्महत्या के पीछे कुछ और शामिल है तो ऐसा भी हो सकता है कि उधारी के रुपयों में खेल करने की नीयत से उसे गायब कर दिया हो।


Connect News 24

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button