बदायूं

Budaun News: मनमाने ढंग से बनाए जा रहे प्रमाण पत्र, दिव्यांग हो रहे परेशान

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Certificates are being made arbitrarily, disabled people are getting worried

दिव्यांग भारत।

बदायूं। दिव्यांग प्रमाण पत्र से दिव्यांगों को सरकार तमाम लाभ दे रही है, लेकिन जिले के दिव्यांग परेशान हैं। उनके अनुसार, जिले में दिव्यांगता प्रतिशत बिना बोर्ड के सामने बुलाए तय किया जा रहा है, जिससे 80 फीसदी दिव्यांगता रखने वाले तमाम लोगों का प्रतिशत मनमाने ढंग से तय कर प्रमाण पत्र थमा दिए जा रहे हैं। इससे उनको शासन की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

दिव्यांगों को लाभ देने के लिए शासन द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जिले के अधिकांश दिव्यांग इन योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। दिव्यांगों का कहना है कि जिला अस्पताल में मनमाने तरीके से प्रमाण पत्र बनाने का किया जा रहा है। विकलांग संगठन के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि मानकों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। अभ्यर्थी जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन की कॉपी निकवाकर अपना अधार कार्ड और दो फोटो के साथ हड्डी वाले डाॅक्टर के सामने जाता है तो वह देखकर ही तय कर देते हैं कि अभ्यर्थी कितना दिव्यांग है। यही कारण है कि कम दिव्यांग लोग सांठ गांठ कर प्रतिशत बढ़वाने में कामयाब हो जाते हैं और 80 फीसदी दिव्यांग वाले 30 से 40 प्रतिशत का प्रमाणपत्र लेकर घूमते हैं।

यह है प्रक्रिया : दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकारी सीएमओ कार्यालय का है, लेकिन इससे पहले अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित बोर्ड तय करता है कि अभ्यर्थी में कितनी दिव्यांगता है। उसके बाद अभ्यर्थी को मेडिकल कराने भेजा जाता है। यहां जिस अंग से दिव्यांगता होती है, उसका एक्सरे कराने के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास जाना होता है। वह यह तय करते हैं कि बोर्ड द्वारा तय की गई दिव्यांगता सही है या नहीं। डॉक्टर की रिपोर्ट के बाद फाॅर्म सीएमओ कार्यालय में जमा करना होता है। यहां से जांचों व रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

दिव्यांग भारत।

दिव्यांग भारत।


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