Budaun News: सीएचसी का हाल… दीवारों पर गंदगी और खिड़कियों पर लगे मिले जाले

जगत सीएचसी का निरीक्षण कर मरीजों का हाल जानते डीएम मनोज कुमार।स्रोत-सूचना विभाग
बदायूं। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को परखने के लिए डीएम मनोज कुमार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगत का औचक निरीक्षण किया। स्वास्थ्य केंद्र की दीवारों समेत अन्य स्थानों पर गंदगी और खिड़कियों पर लगे मकड़ियों के जाले देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
बृहस्पतिवार को डीएम ने पीएनसी वार्ड में भर्ती मरीजों को दवाएं एवं खान-पान समय से मिलने के संबंध में जाना और निर्देश दिए कि मरीजों को समय से दवाएं भोजन आदि सुविधाएं उपलब्ध रहें। उन्होंने कोल्ड चैन कक्ष में फ्रिज का तापमान, कुत्ता काटने आदि इंजेक्शन उपलब्धता की जानकारी ली। यहां डस्टबिन काफी गंदा था तथा दीवारों पर भी गंदगी फैली थी। यहां विद्युत बॉक्स भी खुले मिले, जिन्हें ठीक कराने के निर्देश दिए।
एसडीएम सदर एसपी वर्मा ने डॉ. पलवीन कौर के साथ सीएचसी कादरचौक का निरीक्षण किया। यहां एमओआईसी, सफाई कर्मचारी व कंप्यूटर ऑपरेटर अनुपस्थित मिले। यहां छत से पानी टपक रहा था एवं पूरे स्वास्थ्य केंद्र व परिसर में गंदगी मिली। उन्होंने पाया कि सफाई कर्मचारी भी दो दिन से नहीं आया है। मेडिसिन स्टॉक रजिस्टर नहीं मिला। एसडीएम दातागंज धर्मेंद्र कुमार सिंह ने सीएचीसी का जायजा लिया। चिकित्सकों को निर्देश दिए कि किसी मरीज को कोई दिक्कत न हो। अस्पताल में सफाई व्यवस्था सही नहीं थी। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि परिसर में जलभराव रहता है।
बिल्सी, बिसौली और सहसवान में भी एसडीएम ने देखीं व्यवस्थाएं
बदायूं। एसडीएम बिल्सी जीत सिंह राय को निरीक्षण के दौरान परिसर में घास कूड़ा करकट, मेडिकल वेस्टेज आदि बिखरा पड़ा मिला। भवन की छत पर घास मिली एवं खिड़कियों से वर्षा का पानी अंदर आ रहा था। ओपीडी में पूर्ण रूप से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहे थे। एसडीएम बिसौली कल्पना जायसवाल ने सीएचसी आसफपुर का निरीक्षण किया। यहां सामान्य दवाऐं उपलब्ध पाई गईं। आपातकालीन कक्ष में भी आवश्यक दवाएं व उपकरण उपलब्ध पाए गए। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. पंकज शर्मा को परिसर में नियमित रूप से सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराए जाने के लिए निर्देशित किया। एसडीएम सहसवान प्रेमपाल सिंह ने निरीक्षण के दौरान लैब में गंदगी को साफ कराने के निर्देश दिए। मरीजो की संख्या अत्यधिक थी, वहीं गर्मी व उमस से मरीज व तीमारदारों के बैठने की व्यवस्था नहीं थी। संवाद