Budaun News: अफसरों की मेहरबानी से ढाई साल से बन रहा था केमिकल वाला सॉस
उझानी। बहादुरगंज मोहल्ले में घातक रसायनों से चिली और टोमेटो सॉस बनाने की फैक्टरी खाद्य विभाग के अधिकारियों की मेहरबानी से ही चल रही थी। अफसरों के रहमोकरम से ही फैक्टरी संचालक करीब ढाई साल से धंधा करता आ रहा था। पिछले साल नवंबर में उसने लाइसेंस बनवाया भी, लेकिन इसकी अवधि भी एक महीना पहले समाप्त हो गई थी। फैक्टरी में बनी सॉस जीओजी ब्रांड के नाम से पैक कर आसपास के जिलों में खपाई जा रही थी।
गायत्री फूड्स के नाम से चिली और टोमेटो सॉस के निर्माता श्रवण राठौर के परिजन एक राजनीतिक दल से जुड़े हैं। करीब ढाई साल पहले उसने जिस स्थान पर रसायनों के इस्तेमाल से सॉस बनाने का काम शुरू किया, उसे देखकर कोई सहज अंदाजा नहीं लगा सकता कि अंदर कोई लोगों की सेहत से खिलवाड़ का धंधा चल रहा होगा। श्रवण ने शुरुआत में ही बोतल पैक सॉस को जीओजी ब्रांड का नाम दिया था।
जीओजी ब्रांड की सॉस इलाके में ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी बेची जा रही थी, लेकिन फैक्टरी संचालक ने जीओजी ब्रांड को खाद्य एवं औषधि में विभाग में रजिस्टर्ड नहीं कराया। करीब डेढ साल तक यह धंधा बिना लाइसेंस के चलता रहा। पिछले साल नवंबर में उसने लाइसेंस बनवाया लेकिन उसकी अवधि समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण कराने की जरूरत नहीं समझी।
माना जा रहा है कि अधिकारी केवल लाइसेंस नवीनीकरण न होने के कारण ही उसके यहां पहुंचे थे। इसके बाद उन्हें नकली सॉस बनाने की जानकारी हुई। हालांकि विभाग के किसी भी अधिकारी को यह जानकारी पिछले सालों से न रही हो, ऐसा मुमकिन नहीं लगता। इलाके के लोगों की मानें तो पिछले साल कुछ अफसर फैक्टरी में चेकिंग के लिए पहुंचे भी थे। उन्होंने कार्रवाई की या नहीं, यह तो लोगों को नहीं पता लेकिन माहौल अफरातफरी का बना रहा था।
लोगों का मानना है कि तब फैक्टरी मालिक ने अपने परिजनों की राजनीतिक पैठ का फायदा उठाकर मामला सेट कर लिया था, इसीलिए तब कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। सहायक आयुक्त, द्वितीय सीएल यादव का कहना है कि वह कुछ समय पहले ही जिले में आए हैं, उन्हें जानकारी मिली थी कि बिना लाइसेंस फैक्टरी का संचालन किया जा रहा है, इस पर वह जांच के लिए पहुंचे थे। यहां नकली सॉस बनाने का भंडाफोड़ हो गया।
ठेले-खोमचे वाले ज्यादा प्रयोग करते थे ये सॉस
फैक्टरी में जो नकली सॉस पकड़ा गया, उसे सड़कों पर लगने वाले फास्टफूड के ठेले वाले ज्यादा प्रयोग करते थे। चूंकि ये ब्रांडेड सॉस से काफी सस्ता पड़ता था, इसलिए ये लोग उसे ले जाते थे। हालांकि इनमें से भी अधिकांश को ये नहीं पता था कि वे अनजाने में अपने ग्राहकों को जहर खिला रहे हैं। जानकार बताते हैं कि ब्रांडेड सॉस का स्वाद अच्छा होता है लेकिन ठेले खोमचे पर खड़े होकर खाने में कोई इस पर गौर नहीं करता। अधिकांश ठेले वाले ब्रांडेड सॉस की बोतलों में भरकर ही इसका प्रयोग करते हैं।
दातागंज में सरसों के तेल से लेकर रसगुल्ला तक मिलावटी
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। खाद्य पदार्थों को लेकर तहसील क्षेत्र के लोगों को ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है। इस समय क्षेत्र में सरसों के तेल से लेकर रसगुल्ला तक मिलावटी बेचे जा रहे हैं। क्षेत्र से थोक में इनकी सप्लाई हो रही है। इससे कौन सी दुकान पर शुद्ध या मिलावटी खाद्य पदार्थ है, यह पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अब तो तहसील क्षेत्र मिलावटी मावा, पनीर और सरसों के तेल के लिए बदनाम होता जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारी बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे।
तहसील क्षेत्र में मावा, पनीर और देसी घी तक बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है। क्षेत्र में जगत, बराही और कादराबाद से लेकर कई स्थान ऐसे हैं, जहां बड़े पैमाने पर खोया, पनीर और देशी घी तैयार किया जा रहा है। अभी कुछ समय पहले बराही पुलिस चौकी के नजदीक में नकली पनीर और देसी घी बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई थी। यहां कई पीपा नकली देसी घी और करीब डेढ़ क्विंटल से ज्यादा सिंथेटिक पनीर पकड़ा गया था। मिलावटखोर उत्तराखंड तक पनीर, घी और खोया सप्लाई कर रहे थे।
अब केवल खोया या पनीर की बात नहीं, मिलावटी सरसों का तेल भी बड़े पैमाने पर कस्बा और इलाके में सप्लाई किया जा रहा है। यह सरसों का तेल थोक में म्याऊ इलाके से आता है और यहां दुकानों पर सप्लाई कर दिया जाता है। इस तेल और शुद्ध तेल की कीमत में करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा का फर्क है। जिस तरह माफिया सिंथेटिक पनीर बना रहे हैं, वैसे ही दही और रबड़ी भी तैयार कर रहे हैं। थोक में सोनपापड़ी और रसगुल्ला तक मिलावटी आ रहा है।
इन्हें निजी वाहनों में बाहर से लादकर लाया जाता है और सीधे दुकानों पर सप्लाई कर दिया जाता है, जिससे ग्राहक यह भी अनुमान नहीं लगा पाते हैं कि यह रसगुल्ला या सोनपपड़ी दातागंज में तैयार की गई है या कहीं बाहर से लाई गई है। इस तरह कस्बा और उसके आसपास इलाके में मिलावटी खाद्य पदार्थों का धंधा खूब फलफूल रहा है।



