Budaun News: बच्चो! तुम्हारी नहीं किसी को फिक्र… स्वेटर की आस में ठिठुरते रहिए

बिना स्वेटर पहने प्राथमिक विद्यालय पटियाली सराय में बैठे छात्र
बदायूं। सर्दी का मौसम शुरू हुए एक महीना बीत चुका है। दो दिन पहले हुई बूंदाबांदी से ठंड के तेवर तल्ख हो चुके हैं, लेकिन जिले के परिषदीय स्कूलों के एक लाख से ज्यादा बच्चों को अब तक यूनिफाॅर्म व स्वेटर खरीदने के लिए रुपये नहीं मिले हैं। बच्चे बिना यूनिफॉर्म और स्वेटर के ही ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं।
रुपये न मिलने का कारण अभिभावकों के बैंक खातों का आधार कार्ड से लिंक न होना बताया जा रहा है। तमाम बच्चे ऐसे भी हैं जिनका आधार कार्ड ही नहीं बना है। ऐसे में कहीं विभागीय लापरवाही तो कहीं अभिभावकों की उदासीनता बच्चों की ठिठुरने के लिए विवश कर रही है।
जिले में कक्षा एक से आठ तक के 345853 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें से 245574 छात्र-छात्राओं के खातों में ही शासन स्तर से यूनिफॉम, स्वेटर की धनराशि पहुंची है। 1,00,279 छात्र-छात्राओं को अभी तक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से धनराशि नहीं मिली है। ये छात्र-छात्राएं ठंड में बिना स्वेटर के स्कूल आने के लिए मजबूर हैं।
सरकारी सिस्टम की लापरवाही की वजह से अधिकांश छात्र-छात्राओं का पैसा नहीं आया है। इसमें शिक्षकों की भी लापरवाही देखने को मिल रही है, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड आने के बाद भी उसका सत्यापन नहीं किया गया है। कुछ हद तक इसके लिए अभिभावक भी जिम्मेदार है। उन्होंने समय से विद्यालयों में बच्चों का और अपना आधार कार्ड जमा नहीं किया।
14,324 बच्चों ने जमा नहीं किया आधार, 8800 का सत्यापन नहीं
शासन के निर्देश है कि प्रवेश के समय ही छात्र-छात्राओं से आधार कार्ड लिया जाए। दूसरा नियम यह है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित भी नहीं रहना चाहिए। ऐसे में जिले में बिना आधार कार्ड जमा किए 14,324 छात्र-छात्राएं स्कूलों में पंजीकृत हैं। ये बच्चे अभिभावकों की लापरवाही के कारण ही धनराशि पाने से वंचित हैं। शिक्षकों ने भी इन अभिभावकों को कई बार अवगत कराया है लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
हालांकि शिक्षकों की लापरवाही ये रही कि जिन अभिभावकों की ओर से विद्यालय में आधार कार्ड जमा करा दिए गए हैं, उनका शिक्षकों के स्तर से सत्यापन नहीं किया जा रहा है। इसमें अभिभावकों के 1014 और छात्र-छात्राओं के 7786 आधार कार्ड अभी पेंडिंग हैं। ऐसे में ये बच्चे शासन की योजना का लाभ पाने से वंचित हैं।
70-75 हजार छात्र-छात्राओं की डीबीटी लंबित
अभिभावकों और शिक्षकों के स्तर से काम पूरा होने के बाद रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को भेज दी जाती है। वहां से रिपोर्ट शासन के पोर्टल पर अपलोड की जाती है। इसके बाद शासन स्तर से डीबीटी भेजने के लिए छात्र-छात्राओं, अभिभावकों के आधार कार्ड और बैंक खातों का डाटा से मैच किया जाता है। जानकारी सही पाए जाने पर खातों में धनराशि भेज दी जाती है। अभी करीब 70-75 हजार छात्र-छात्राओं का डाटा शासन स्तर पर खातों से मैच होने की प्रक्रिया में है।
शासन से मिलते हैं 1200 रुपये
शासन स्तर से अभिभावकों के खातों में 1200 रुपये भेजे जाते हैं। इसमें 300 रुपये की दर से दो सेट यूनिफार्म के लिए 600 रुपये, स्वेटर के लिए 200 रुपये, जूता-मोजा के लिए 125 रुपये, स्कूल बैग के लिए 175 रुपये और स्टेशनरी के लिए 100 रुपये (चार कॉपी, दो पेन, दो कटर, दो रबर, दो पेंसिल) दिए जाते हैं, लेकिन जिले में कई अभिभावक ऐसे हैं, जिन्होंने धनराशि आने के बाद भी कुछ नहीं खरीदा है।
वर्जन
सभी छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से आधार कार्ड और बैंक खाता नंबर मांगे गए हैं, ताकि शिक्षक समय से डाटा अपलोड कर सकें, लेकिन करीब 14 हजार अभिभावकों ने आधार कार्ड जमा नहीं किए हैं। शिक्षकों के स्तर से भी कुछ काम लंबित है। उन्हें जल्द से जल्द डाटा अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। – स्वाती भारती, बीएसए