Budaun News: फात्मा के हाथ शहर की सरकार

मंडी समिति में हार के बाद बाहर निकलती भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल। संवाद
भाजपा की दीपमाला को दी 5485 वोटों से शिकस्त, पिछले चुनाव में दीपमाला से 3176 वोटों से हारी थीं फात्मा
– चुनाव बाद से माना जा रहा था दीपमाला गोयल और फात्मा रजा के बीच सीधा मुकाबला, कुल 10 प्रत्याशी थे मैदान में
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। शहर नगर पालिका सीट पर निर्दलीय फात्मा रजा भाजपा की दीपमाला गोयल को 5485 वोटों से हराकर शहर की प्रथम नागरिक बन गई हैं। फात्मा को 27571 वोट, जबकि दीपमाला गोयल को 22086 वोट मिले। पिछले चुनाव में भाजपा की दीपमाला ने सपा से चुनाव लड़ीं फात्मा को शिकस्त दी थी। इस चुनाव में फात्मा रजा 3176 वोटों से हारी थीं।
बृहस्पतिवार को हुए चुनाव के बाद ही प्रत्याशियों समेत उनके समर्थकों की धड़कनें बढ़ी हुईं थीं। सबसे ज्यादा कांटे की टक्कर शहर सीट पर मानी जा रही थी। यहां पिछले दो चुनाव में एक-दूसरे को शिकस्त देती आ रहीं दीपमाला गोयल और फात्मा रजा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। पिछले चुनाव में भाजपा की दीपमाला गोयल ने सपा से चुनाव लड़ी फात्मा रजा को 3176 वोटों से हराया था। उस चुनाव में दीपमाला को 32316 वोट तथा फात्मा रजा को 29140 वोट मिले थे। इससे पहले साल 2015 में हुए उपचुनाव में सपा से चुनाव लड़ी फात्मा रजा ने दीपमाला गोयल को हराया था।
हालांकि इस बार शहर सीट से दस प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला दीपमाला गोयल और फात्मा रजा में ही माना जा रहा था। सपा द्वारा इस बार सिंबल न देने पर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष था, जिससे ये भी कयास लगाया जा रहा था कि फात्मा चुनाव नहीं लड़ेंगी। ऐसे में भाजपा की राह काफी आसान लग रही थी क्योंकि दीपमाला के सामने कोई भी मजबूत प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा था। ऐन मौके पर फात्मा ने निर्दलीय नामांकन कराकर भाजपा के सामने चुनौती खड़ी कर दी। इसके बाद भाजपा का पलड़ा लगातार कमजोर नजर आने लगा। पिछले पांच सालों में असंतुष्ट जनता को भी फात्मा के रूप में एक मजबूत प्रत्याशी नजर आया तो उनका वोट भी फात्मा की तरफ रुख कर गया जो दीपमाला की हार का कारण बना।
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वोटिंग का कम प्रतिशत बना हार का कारण : दीपमाला
मतगणना के बाद आए परिणामों के बाद भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल ने जनता का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें जनता ने नकारा नहीं है, बल्कि पूरा वोट दिया है। मतदान का कम प्रतिशत ही उनकी हार का कारण बना है। उन्हें समय भी कम मिला था। जितना समय मिला था, उसमें ही जनता से मिल पाईं।
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मेरी जीत का सारा श्रेय शहर की जनता को : फात्मा
मेरी जीत का सारा श्रेय शहर की जनता को जाता है। ये केवल मेरी जीत नहीं पूरे शहर की जनता की जीत है। जनता ने अपना प्यार और विश्वास मुझ पर जताया है, जिसकी वह आभारी हैँ। सभी लोग अपने तरीके से चुनाव लड़े हैं और सबको लड़ने का अधिकारी भी है। अब आपको पूरा बदायूं नया देखने को मिलेगा। सभी वायदे पूरे किए जाएंगे।



