बदायूं

Budaun News: श्रीगणेश के बाल रूप का वर्णन

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Description of Lord Ganesha's child form

बिल्सी में गणेश कथा को सुनती महिलाएं। संवाद

बिल्सी। श्री सिद्धपीठ बालाजी धाम के तत्वावधान में चल रही पांच दिवसीय भगवान गणेश कथा के तीसरे दिन भगवान गणेश के बाल रूप का वर्णन किया गया।

कथाव्यास भूदेव शंखधार ने कहा कि यह कहानी असुरों के राज गजमुख की है जो चारों ओर अपना आतंक मचाए हुए था। एक दिन शिवजी ने गजमुख की तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान मांगने का कहा। इस पर गजमुख ने शिवजी से दैवीय शक्तियां मांग लीं। वरदान मिलने के बाद गजमुख और अहंकारी हो गया और वह अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने लगा।

गजमुख चाहता था कि सभी देवी और देवता उसकी पूजा करने लगें। इसके बाद शिवजी ने गणेश जी को असुरराज को रोकने के लिए भेजा। गजमुख ने जब गणेशजी की बात को नहीं माना तो दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में गजमुख बुरी तरह से घायल हो गया। इसके बाद भी वह नहीं माना और उसने अपना रूप बदल लिया और मूषक बन गया।

इस पर गणेश जी कूदकर उसके ऊपर बैठ गए, साथ ही गजमुख को हमेशा के लिए मूषक में तब्दील कर दिया। इसके बाद गजमुख मूषक रूप में गणेशजी का वाहन बन गया। इस मौके पर महंत मटरूमल, स्वतंत्र राठी, चारु सोमानी, संजीव शर्मा, जितेंद्र वाष्णेय, मोहित माहेश्वरी, मोहित देवल, सौरभ सोमानी आदि मौजूद रहे। संवाद


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