Budaun News: तालाबों की खोदाई कछुआ चाल, कैसे सहेजेंगे बरसात का पानी

सालारपुर ब्लॉक के दारानगर गांव में जलभराव। संवाद
– जिले में पिछले साल से चल रहा है तालाबों की खोदाई का कार्य
– दो माह पहले जिला प्रशासन ने दो सौ तालाब बनाने का किया था दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। मानसून दस्तक दे चुका है और जिले में अमृत सरोवरों की खोदाई का कार्य अब भी कछुआ चाल चल रहा है। जिले में बहुत से तालाब ऐसे हैं, जिनमें खोदाई होना तो दर्शाई गई है लेकिन उनकी हकीकत कुछ और है। उनमें न तो बरसात का पानी एकत्र हो रहा है और न ही पानी एकत्र करने की कोई व्यवस्था की गई है। ऐसे में बरसात का पानी कैसे सहेजेंगे, कैसे जलस्तर बढ़ेगा, यह खुद में एक बड़ा सवाल है।
पिछले साल 15 अगस्त को जिला प्रशासन ने अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों की खोदाई का कार्य शुरू कराया था। कई तालाबों पर सीमेंट का पक्का बोर्ड लगवाया गया। दो माह पहले जिला प्रशासन ने एक बार फिर इस अभियान पर जोर दिया। इस साल भी करीब दो सौ तालाबों को बनाने का दावा किया गया।
दो माह पहले जिला प्रशासन ने इस संबंध में जिले के सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें दिशा निर्देश दिए। कहा था कि अमृत सरोवर बनाने में तेजी लाई जाए और वहां पौधरोपण भी कराया जाए। दो दिन पहले भी डीएम ने तालाबों की खोदाई के साथ-साथ वहां पौधरोपण कराने के निर्देश दिए।
अब हकीकत पर गौर करें तो शायद ही कहीं तालाबों की खोदाई होती दिखे। पिछले साल जिन तालाबों को अमृत सरोवर बताकर निर्माण पूरा बता दिया गया था, आज भी वे अधूरे पड़े हैं। और तो और उनकी बाउंड्री तक का निर्माण पूरा नहीं कराया गया है। वहां बड़ी-बड़ी घास खड़ी है।
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तालाब की खोदाई होती तो दारानगर में नहीं होता जलभराव सालारपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव दारानगर का इस समय बहुत बुरा हाल है। पूरे गांव में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गांव के मुख्य मार्ग से लेकर सचिवालय के सामने का पूरा मार्ग पानी में डूबा हुआ है। तमाम घरों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्थित तालाब की वर्षों से खोदाई नहीं हुई है। उसकी साफ-सफाई तक नहीं कराई गई है। इससे जलभराव की समस्या खड़ी हो गई है। यहां दूसरी समस्या नाले की भी है। अगर गांव में नाले का निर्माण करा दिया जाता तो शायद गांव का पानी बाहर निकल सकता था लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
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पिछले साल करा दिया उद्घाटन, आज भी अधूरा है अमृत सरोवर उसावां ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत वीरमपुर भदेली में एक अमृत सरोवर बनाने का दावा किया गया है। उस दावे के तहत यहां सीमेंट का पक्का बोर्ड बनवाकर लगवा दिया गया है। प्रधान और सचिव का नाम भी लिखा है लेकिन अमृत सरोवर में आधा कार्य भी नहीं हुआ है। पहले तो उसकी बाउंड्री तक का निर्माण नहीं कराया गया है। खोदाई का कार्य भी नहीं हुआ है। तालाब की जैसे पहले स्थिति थी। आज भी तालाब वैसी ही स्थिति में है।
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नाम का अमृत सरोवर, बड़ी-बड़ी घास चिढ़ा रही मुंह कादरचौक कस्बे में कुछ साल पहले एक झील हुआ करती थी। इसमें पानी भरा रहता था। धीरे-धीरे यह झील सूख गई। झील सूखने से पूरा इलाका बंजर सा हो गया। कुछ समय पहले जिला प्रशासन ने इस झील को दोबारा जीवित करने के उद्देश्य से यहां अमृत सरोवर बनाने का दावा किया, लेकिन आज तक कोई यहां फावड़ा मारने नहीं आया। आज भी यहां खोदाई का कार्य शुरू तक नहीं हुआ है। यहां बड़ी-बड़ी घास खड़ी है। जो प्रशासनिक अधिकारियों के दावे को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है।
जिले में 75 अमृत सरोवर का निर्माण पूरा हो चुका है। मनरेगा की ओर से 202 तालाबों की खोदाई कराई जा चुकी है। जिन तालाबों की खोदाई नहीं हो पाई है, उनकी इस वित्तीय वर्ष में कराई जाएगी। एस्टीमेट बन रहे हैं, जल्द ही वहां भी खोदाई होगी। अगर काम पूरा नहीं हुआ तो बरसात के बाद कराया जाएगा।
– रामसागर यादव, डीसी मनरेगा

सालारपुर ब्लॉक के दारानगर गांव में जलभराव। संवाद

सालारपुर ब्लॉक के दारानगर गांव में जलभराव। संवाद