बदायूं

Budaun News: जिले को मिली 2640 मीट्रिक टन डीएपी, आज से होगा वितरण

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District received 2640 metric tons of DAP, distribution will start from today

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद

बदायूं। करीब 10 दिन से डीएपी की किल्लत से जूझ रहे किसानों को अब राहत मिलने वाली है। शनिवार को जिले को 2640 मीट्रिक टन डीएपी मिल गई है। रविवार को सहकारी समितियों से खाद का वितरण किया जाएगा।

जिले में गेहूं बुवाई का सीजन चल रहा है। 10 दिनों से जिले की सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही थी। इससे किसानों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। प्राइवेट दुकानों से ढाई सौ रुपये अतिरिक्त देकर खाद खरीदनी पड़ रही थी। शनिवार को जिले को 2640 मीट्रिक टन खाद मिल गई। शनिवार दोपहर से समितियों के लिए खाद भेजी गई, जो देर रात तक पहुंच गई। अधिकारियों का कहना है कि रविवार को खाद का वितरण होगा।

खाद की सूचना पर समितियों पर पहुंचे किसान

सहकारी समितियों पर पिछले कई दिनों से खाद नहीं थी। इससे किसान काफी परेशान थे। जैसे ही किसानों को सूचना मिली कि समितियों पर खाद पहुंच गई है, शनिवार को ही किसान खाद लेने के लिए समितियों पर पहुंचने लगे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ ली। समितियों पर तैनात सचिवों का कहना था कि खाद आ गई है, लेकिन मिलान करने के बाद रविवार को वितरण किया जाएगा।

अभी दो हजार मीट्रिक टन डीएपी और चाहिए

गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को डीएपी की बहुत जरूरत है। कृषि विभाग के अनुसार नवंबर में किसानों को करीब 20 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। अब तक जिले को 18 हजार मीट्रिक टन खाद मिल चुकी है। अभी दो हजार मीट्रिक टन खाद और चाहिए। विभाग के अनुसार चार-पांच दिन के अंदर एक रैक और आ सकती है। इसके बाद मांग के अनुसार किसानों का खाद मुहैया करा दी जाएगी।

किसान बोले- अवकाश के दिन ही बांटी जाए खाद

फाेटो-34

काफी दिनों बाद समिति पर खाद पहुंची तो उम्मीद जगी कि अब खाद मिल जाएगी, लेकिन समिति पर पहुंचकर पता चला कि रविवार को वितरण होगा। खाद आ गई है तो उसका तुरंत वितरण किया जाना चाहिए। – बासुदेव, उघैती गर्वी

सहकारी समितियों पर काफी दिनों से खाद नहीं थी। ऐसे में खाद लेने के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। कुछ एक दुकानों पर खाद मिल रही थी लेकिन महंगे दामों पर बिक्री की जा रही थी। – विश्वनाथ, म्याऊ

-किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह से आलू की बुवाई में काफी देरी हो गई। इसका प्रतिकूल प्रभाव आलू की उपज पर पड़ेगा। किसानों को मजबूरन ब्लैक में निजी विक्रेताओं से खाद खरीदनी पड़ रही है। – साहिबे आलम, सैदपुर

डीएपी न मिले तो एनपीके का प्रयोग करें किसान

दातागंज कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, अच्छी उपज के लिए एक बीघा में 10 किलो डीएपी लगानी होती है। इसके साथ पांच किलो प्रति बीघा पोटाश भी लगानी चाहिए। डीएपी न मिलने पर किसान एनपीके का भी उपयोग कर सकते हैं। प्रति बीघा 15 किलो एनपीके किसानों को लगानी चाहिए। एनपीके में नाइट्रोजन के साथ-साथ फास्फोरस और पोटाश होती है। किसानों को प्रति बीघा एक किलो जिंक भी लगानी चाहिए। खाद का प्रयोग करने से पहले किसान मिट्टी का परीक्षण जरूर करा लें।

डीएपी की रैक आ गई है। सभी समितियों पर खाद भेज दी गई है। रविवार को अवकाश होने के बावजूद खाद का वितरण कराया जाएगा। इसे लेकर सभी सचिवों को निर्देशित कर दिया गया है। – महेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद

डीएपी खाद उतारते श्रमिक। संवाद


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