Budaun News: पहले होती थी खेती, अनदेखी से अब बंजर हो गई जेल की जमीन

जिला जेल की जमीन में खड़े पेड़ और झाडियां। संवाद
बदायूं। प्रशासन और विभागीय अनदेखी के चलते जेल की 10 एकड़ जमीन अनुपयोगी साबित हो रही है। जंगली पेड़ और झाड़ ने जमीन को घेर लिया है। 10 साल पहले इन्हीं खेतों में बंदियों को ले जाया जाता था। उनसे खेती कराई जाती थी। फसल से जेल की आय बढ़ती थी, लेकिन अनदेखी के कारण जमीन अब बंजर हो गई है।
आज कृषि सिर्फ गांवों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मल्टी नेशनल कंपनियों का टॉस्क बन गई है। इस क्षेत्र से जुड़कर अब उच्च शिक्षित युवा आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यहां तक कि अब जेलों में भी कैदियों को खेती करके आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा हैै, लेकिन बदायूं में प्रशासन और विभागीय अनदेखी के चलते कारागार की जमीन पर करीब 10 साल से खेती का काम बंद है, जबकि पहले यहां सब्जियों की खेती की जाती थी।
बताते हैं कि करीब 10 साल पहले जेल की दस एकड़ जमीन पर खेती होती थी, लेकिन अब घनी झाड़ियाें ने जमीन को घेर लिया है। आसपास का गंदा पानी भी यहां जमा हो रहा है। जेल की यह जमीन पोस्टमार्टम हाउस के पीछे और आगे की तरफ है। अब इस जमीन पर छुट्टा जानवरों ने अपना ठिकाना बना लिया है।
जेल अधीक्षक डॉ. विनय कुमार का कहना है कि जेल की जमीन पर कई सालों से खेती नहीं हो पा रही है। बंदियों कैदियों को खेती से जोड़कर उनको आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है इसके लिए जिला प्रशासन को अवगत भी कराया गया है। जैसा भी आदेश मिलेगा उसी के हिसाब से काम किया जाएगा।



