Budaun News: तीन दिन में स्कूल प्रबंधक का नाम पता नहीं कर पाया शिक्षा विभाग
उसावां। म्याऊं-हजरतपुर मार्ग हादसे में चार स्कूली बच्चों की मौत के बाद से एसआरपीएस इंग्लिश मीडियम स्कूल और उसके प्रबंधक अशोक कुमार का नाम हर किसी की जुबान पर है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग अब भी इससे अनभिज्ञ है। अधिकारी तीन दिन बाद भी प्रबंधक का नाम पता नहीं कर पाए हैं। काफी फजीहत के बाद बुधवार को बीईओ वीरेश कुमार सिंह ने स्कूल के अज्ञात प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। हालांकि यह माना है कि स्कूल फर्जी तौर पर बिना मान्यता के चल रहा था।
सोमवार को म्याऊं-हजरतपुर रोड पर एसआरपीएस इंग्लिश मीडियम स्कूल की वैन और सत्यदेव विद्या पीठ इंटर कॉलेज की बस में जोरदार भिड़ंत हो गई थी। इसमें इंग्लिश मीडियम स्कूल के चार बच्चों और वैन चालक की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद इंग्लिश मीडियम स्कूल का संचालक सारा सामान लेकर फरार हो गया। स्कूल के नाम लिखे बैनर-पोस्टर तक हटा दिए गए। बोर्ड भी उखाड़ लिया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारी संचालक को बचाने की कोशिश करते रहे। उसके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई गई।
काफी फजीहत के बाद जब बुधवार को एफआईआर दर्ज कराई गई तो उसमें स्कूल प्रबंधक का नाम-पता नहीं दिया गया। प्रबंधक को अज्ञात बताया गया है, जबकि शिक्षा विभाग के बीईओ वीरेश कुमार सिंह का दावा है कि 18 अक्तूबर 2023 को उन्होंने स्कूल प्रबंधक को नोटिस भेजा था। उससे कहा था कि वह अपना स्कूल बंद कर दे, लेकिन उसने स्कूल बंद नहीं किया था। यह स्कूल बिना मान्यता के चल रहा था। इसके बावजूद प्रबंधक मान्यता बताकर बच्चों के प्रवेश कर रहा था।
डेढ़ साल में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कोई नोटिस नहीं भेजा। जब हादसा हुआ तो नोटिस भेजने की बात सामने आई है। इसमें यह भी माना जा रहा है कि हाल में नोटिस इसलिए दिखाया गया है कि विभाग पर सवाल न उठें। अगर पहले का नोटिस दिखाया जाता तो कार्रवाई पर सवाल उठना लाजिमी थे। फिर भी प्रबंधक को नामजद न करना ही तमाम सवाल खड़े कर रहा है। इधर बीईओ से जब इस बारे में पूछ गया तो उन्होंने कहा कि बिना मान्यता वाले स्कूल प्रबंधक के खिलाफ तहरीर दी थी। उस दौरान तक उसके प्रबंधक का नाम नहीं पता चल पाया। इसके बाद एक पारिवारिक सदस्य की मौत की बात कहते हुए उन्होंने फोन काट दिया।
सरकारी स्कूल में भी हैं इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चों के एडमिशन
म्याऊं। म्याऊं-हजरतपुर रोड पर हुए हादसे के बाद एक और मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जो बच्चे एसआरपीएस इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ रहे थे, उनमें से अधिकतर बच्चों के एडमिशन गांव के सरकारी स्कूलों में भी हैं जबकि वह लगातार इंग्लिश मीडियम स्कूल आ रहे थे। हर माह उनकी सरकारी स्कूल में उपस्थिति दर्ज हो रही थी। इसके पीछे यह भी बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूल के अध्यापक उनका मिड-डे मील हड़प रहे थे। इनमें ग्योति गांव के 18 बच्चों के नाम सरकारी स्कूल में दर्ज होने की बात सामने आई है।
वैन में सवार थे 30 बच्चे, एक घायल का नाम भी छोड़ा
घायल छात्र तरुण के पिता होशियार सिंह का दावा है कि वैन में करीब 30 बच्चे सवार थे। उनमें तीन बच्चों को चोट नहीं आई थी। वे घटनास्थल से ही अपने घर चले गए थे। होशियार सिंह उसावां थाना क्षेत्र के गांव नगरिया अभय का रहने वाले हैं। तरुण को हादसे में काफी गंभीर चोटें आईं लेकिन जिला प्रशासन की ओर जारी घायलों की सूची में उसका नाम दर्ज नहीं किया गया है, जबकि उसका उपचार भी जिला अस्पताल में हुआ था।
जिला अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों की छुट्टी
जिला अस्पताल में अब तक 17 बच्चों का उपचार चल रहा था। इन सबकी छुट्टी कर दी गई है। हालांकि अभी राजकीय मेडिकल कॉलेज और बरेली में भर्ती छात्र का उपचार चल रहा है।



