Budaun News: मेला ककोड़ा में सड़क पर बिछाई जाने लगीं बीड़ें और पतेल

मेला ककोड़ा में सड़क पर बीड़ा (पतेल) बिछाते श्रमिक । संवाद
कादरचौक। मेला ककोड़ा की तैयारियां लगातार तेजी पकड़ रही हैं। मेले की सड़क पर बीड़ें और पतेल बिछाने का काम शुरू हो गया है। आसपास गांवों की महिलाओं ने बिक्री के लिए मिट्टी के चूल्हे बनाने शुरू कर दिए हैं। मेले में प्रवास के लिए आने वाले श्रद्धालु भोजन बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे खरीदते हैं।
रुहेलखंड के मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा में सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। सड़क का चिह्नांकन करने के बाद में वहां पर अब बीड़ा (पतेल) बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि कच्ची सड़कों पर वाहनों को चलने में किसी भी प्रकार की दिक्कत न आने पाए। जिला पंचायत के अनुसार दो दिन में गंगा के मुख्य घाट तक वन वे रोड चालू कर दिया जाएगा।
वीआईपी इलाके में भी सड़क समेत अन्य कार्य शनिवार से शुरू हो गए हैं। मेले में हजारों परिवार कई दिन तक प्रवास करते हैं। ऐसे में वहां चूल्हाें पर खाना बनाया जाता है। इसके चलते मिट्टी के चूल्हों की बड़ी संख्या में ब्रिकी होती है। इसको ध्यान में रखते हुए मुंशी नगला गांव में महिलाएं मिट्टी के चूल्हे बनाने में जुट गईं हैं।
बीड़ों के बढ़ गए दाम
पिछले साल जहां पतेल-बीड़ का रेट 450 रुपये प्रति डनलप था, वहीं इस बार महंगाई के चलते प्रति 500 से 600 रुपये में बिक रही है। मेले में प्रवास करने वाले लोग भी अपने तंबुओं में बिछाने के लिए पतेल और पुआल खरीदते हैं।
जेई ने हेड मल्लाह के साथ जलस्तर का जायजा लिया
जिला पंचायत के जेई लालता प्रसाद, केएन पांडेय, वीनेश कुमार ने हेडमल्लाह मुसाकिर के साथ शनिवार को गंगा के जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि अगर बाढ़ खंड के सहयोग से गंगा के रुख में हल्का परिवर्तन कर दिया जाए तो ककोड़ा मेले के मुख्य घाट पर ही गंगा की धारा रहेगी। इसके लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों से बात की जा रही है।

मेला ककोड़ा में सड़क पर बीड़ा (पतेल) बिछाते श्रमिक । संवाद



