बदायूं

Budaun News: पांच किलो रुपये के भी नहीं मिल रहे दाम… पशुओं को गोभी खिला रहे किसान

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Farmers are not getting price even for Rs 5 kg, farmers are feeding cabbage to animals

उझानी में पालतू पशुओं से चरवाते गोभी की फसल। संवाद

उझानी। पछेती फूल गोभी की फसल ने इस बार किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। प्रति बीघा करीब पांच हजार रुपये की लागत लगाने के बाद अब थोक में पांच रुपये किलो का भी भाव नहीं मिल रहा है। अच्छे भाव के इंतजार में कहीं गेहूं की बुआई का समय न निकल जाए, सो किसान अपने पशुओं को खेतों में ले जाकर गोभी खिला रहे हैं। कुछ ने जुताई करके फसल पलट दी है।

पिछले कुछेक सालों में फूल गोभी की फसल से किसानों की बल्ले-बल्ले होती रही है। इस बार भी फसल काफी अच्छी हुई। शुरुआती दिनों में थोक बाजार में किसानों को रेट भी उम्मीद के अनुरूप मिला। थोक में गोभी 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकी, लेकिन पछेती फसल बाजार में आई तो रेट में तेजी से गिरावट आ गई। हालात ये हैं कि अब पांच रुपये किलोग्राम के दाम भी हाथ नहीं आ रहे हैं।

उत्पादकों की मानें तो गोभी की फसल पर प्रति बीघा करीब पांच हजार रुपये की लागत आई है। अधिकतर उत्पादक अब तक प्रति बीघा ढाई-तीन हजार रुपये से अधिक की गोभी नहीं बेच पाए हैं। इन दिनों खेतों से गोभी की कटाई, पैकिंग और लेबर पर ही दो-तीन रुपये प्रति किलो के हिसाब से खर्चा आ जाता है।

एक ओर करीब दो हजार रुपये प्रति बीघा का घाटा तो दूसरी तरफ गेहूं की फसल के लिए खेत खाली करने की जल्दी ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। ऐसे में तमाम उत्पादक पालतू जानवरों को खेत में ले जाकर गोभी खिला रहे हैं। कुछ किसानों ने ट्रैक्टर से फसल जोत दी है। उत्पादक गेहूं की बुवाई कर नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं।

फुटकर में रेट अब भी आठ से 10 रुपये

थोक के विपरीत फुटकर में सब्जी विक्रेता 8-10 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर गोभी बेच रहे हैं। सब्जी विक्रेता जगपाल ने बताया कि थोक में पांच रुपये किलो गोभी खरीदने पर कुछ माल खराब निकल आता है। छंटाई के बाद ही उसे बेचा जाता है। दो- ढाई रुपये किलो का फायदा तो उन्हें भी मिलना चाहिए।


किसान बोले- गेहूं से घाटे की भरपाई की उम्मीद

फोटो- 5

इस बार दो बीघा खेत में फूल गोभी की फसल की। लागत करीब 10 हजार रुपये आई। डेढ़ सप्ताह पहले तक करीब छह हजार रुपये की गोभी बिक चुकी है, लेकिन अब थोक बाजार में पांच रुपये किलो का भाव देने में भी व्यापारी ना-नुकर कर रहे हैं। ऐसे में अपने पशुओं को गोभी खिला रहे हैं। – भूरे गद्दी, उझानी

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गेहूं की बुवाई का समय निकलता जा रहा है। गोभी के रेट बढ़ने की अब उम्मीद भी नजर नहीं आ रही। ऐसे में फसल को उजाड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं दिखा। अब गेहूं से घाटे की भरपाई की उम्मीद है। – ओमकार शर्मा, गढ़ी

वर्जन

जिले में फूल गोभी की फसल काफी अच्छी हुई है। कीट का भी फसल में प्रकोप नहीं रहा। बंपर पैदावार की वजह से रेट में गिरावट से नुकसान हो सकता है, लेकिन नुकसान इतना भी नहीं कि बहुत ज्यादा घाटा हो। – डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

उझानी में पालतू पशुओं से चरवाते गोभी की फसल। संवाद

उझानी में पालतू पशुओं से चरवाते गोभी की फसल। संवाद

उझानी में पालतू पशुओं से चरवाते गोभी की फसल। संवाद

उझानी में पालतू पशुओं से चरवाते गोभी की फसल। संवाद


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