बदायूं

Budaun News: प्रशासन की नजर में बाढ़ से सिर्फ 139 ही घर उजड़े दिखे

Connect News 24

In the eyes of the administration, only 139 houses were seen destroyed due to floods.

तौफी नगला में इस तरह रहते लोग। संवाद

बदायूं। गंगा और रामगंगा की बाढ़ व कटान की चपेट में आने से केवल दातागंज और सहसवान तहसील क्षेत्र में ही 300 से ज्यादा परिवार बेघर हो गए थे। प्रशासन ने अब जब बेघरों को चिह्नित कराया है तो सिर्फ 139 घर ही उजड़े पाए हैं। इन्हें मुआवजे की प्रकिया शुरू कर दी गई है। बाढ़ पीड़ितों के अनुसार तमाम बेघर परिवार प्रशासन की नजर में आने से बच गए हैं। इधर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई घर रह गया है तो वह लिखकर दे सकता है।

जिले में इस बार करीब ढाई माह तक लोगों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ी थी। इसका असर जिले की दातागंज, सहसवान और सदर तहसील में देखने को मिला था। इनमें भी सबसे ज्यादा तबाही दातागंज तहसील में हुई। दातागंज तहसील के गांव अहमद नगर बछौरा, जटा, कमलू आदि में करीब 50 परिवार बेघर हुए।

सहसवान के वीर सहाय नगला, तेलिया नगला, तौफी नगला आदि गांवों का हाल भी बेहद खराब रहा। कई दूसरे गांवों में घर बाढ़ की चपेट में आए और नदी में समा गए। किसी का पूरा घर ही बाढ़ की भेंट चढ़ गया तो किसी के घर का आधा हिस्सा समा गया। अब बाढ़ खत्म होने के बाद में इस माह जिला प्रशासन ने घरों का चिह्नांकन शुरू करा दिया है।

प्रशासन की प्रथम सूची में 139 घरों को चिह्नित किया गया है, लेकिन ग्रामीणों की मानें तो 300 से ज्यादा घर प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने अभी घरों को शामिल नहीं किया है। वहीं चिन्हित घरों को अब मुआवजा देने की तैयार हो रही है।

शासन ने जारी किया एक करोड़ का बजट

शासन की ओर से बाढ़ ग्रस्त जिलों के लिए राज्य आपदा मोचक निधि योजना के तहत फंड दिया जा रहा है। इसके तहत बाराबंकी, कन्नौज, बलिया और बदायूं के लिए धनराशि का आवंटन किया गया है। बाराबंकी को 75 लाख रुपये, कन्नौज को 16.64 लाख, बलिया को 50 लाख और बदायूं के लिए सबसे ज्यादा एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। हालांकि जिन लोगों को चिह्नित किया गया है, ये वे लोग हैं जिनके मकान पूरी तरह बाढ़ से नष्ट हो गए हैं। आने वाले समय में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

प्रशासन की संख्या से ज्यादा आंकड़ा बता रहे प्रधान

जटा गांव के प्रधान निशांत के अनुसार उनके यहां करीब 35 लोगों के घर गंगा में समा गए, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ 26 घर चिह्नित किए हैं। अहमद नगर बछौरा के प्रधान अजीत ने बताया कि उनके गांव में 59 परिवार बेघर हुए। इनमें प्रशासन ने 50 घर चिहिन्त किए हैं। कमलू नगला प्रधान राकेश के अनुसार गांव में 25 घर बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। प्रशासन की नजर में सिर्फ 11 घर ही गंगा की भेंट चढ़े हैं।

-बाढ़ की वजह से कई लोगाें के घर पूरी तरह गंगा में समा गए। मेरा भी मकान बाढ़ की भेंट चढ़ गया। ऐसे में सभी लोग प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद लगाए हैं। – लाखन, कमलू नगला

– बाढ़ के बाद में अब तो जिला प्रशासन से उम्मीद है। वहीं से कुछ राहत मिल सकती है। कब मिलेगी राहत राशि और कितनी मिलेगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं बताया है। – रामकिशोर, बहेटी


मुआवजा से आंसू भी नहीं पुंछ पाएंगे

बाढ़-कटान की चपेट में आकर बेघर हुए लोगों को मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही लग रहा है। वह गरीब के आंसू भी नहीं पौंछ पाएगा। प्रशासन की ओर से पक्का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर 120000 रुपये, पक्का घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर 65000 रुपये, झोंपड़ी नष्ट होने पर 8000 रुपये का मुआवजा दिया जाना है।

छप्पर डालकर रह रहे लोग

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की बात करें तो जिन लोगों के घर बाढ़ की चपेट में आकर जमीदोंज हो गए, वह लोग छप्पर डालकर गुजरा कर रहा है। घर का सामान भी घर के साथ चपेट में आ गए थे। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को मुआवजा तय करते समय सभी चीजों को देखना चाहिए। मकान के साथ उसमें कितने सामान का नुकसान हुआ है, यह भी देखना चाहिए।

वर्जन

– बाढ़ की वजह से कई लोग प्रभावित हुए थे। कई के घर बाढ़ में समा गए, कुछ टूट गए हैं। इनकी जांच संबंधित एसडीएम से कराई है। 139 घर पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इनमें यह स्पष्ट कराया जा रहा है कि कितने घर कच्चे थे और कितने पक्के। इसके अलावा भी यदि किसी के मकान बाढ़ से प्रभावित हुए हैं तो वे प्रार्थनापत्र दे सकते हैं। – आरके पटेल, एडीएम एफआर


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