Budaun News: बारिश में फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ा

जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का इलाज करते डॉक्टर। संवाद
– इस मौसम में ज्यादा पनपती हैं त्वचा संबंधी बीमारियां
– जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे 150 से 200 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। बारिश का मौसम गर्मी से तो राहत दिलाता है लेकिन अपने साथ कई बीमारियां भी लाता है। खासकर त्वचा संबंधी बीमारियां इस मौसम में ज्यादा होती हैं। फंगल इन्फेक्शन भी इनमें से एक है। डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से पनपते हैं। पानी और नमी में बैक्टीरिया बढ़ने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।
बारिश में भीगना आनंददायक तो लगता है लेकिन यह कई बीमारियों का कारण भी बनता है। दरअसल, बारिश में भीगने के बाद कपड़े न बदलने से फंगल इंफेक्शन हो सकता है। तौलिया, साबुन, कपड़े शेयर करना फंगस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित होने का कारण बन सकता है।
इसके अलावा एक ही कपड़े को बिना धोए बार-बार पहनना भी फंगल इन्फेक्शन फैला सकता है। जिला अस्पताल की बात करें तो इस समय प्रतिदिन 150 से 200 मरीज त्वचा संबंधी रोगों के पहुंच रहे हैं। इनमें फंगल इन्फेक्शन के रोगियों की संख्या ज्यादा है।
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ये रखें सावधानी
– बारिश में भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदल लें। ज्यादा देर तक भीगे कपड़े पहनना फंगल इन्फेक्शन का कारण बन सकता है।
– यदि पसीना ज्यादा आ रहा हो और कपड़े भीग रहे हों तो यथाशीघ्र कपड़े बदल लें।
– बारिश में यदि जूते भीग गए हों तो उन्हें भी नहीं पहनना चाहिए।
– कोशिश करें कि घर के प्रत्येक सदस्य की तौलिया अलग हो। यदि ऐसा न हो तो कम से कम मरीज की तौलिया किसी को प्रयोग न करने दें।
– नहाने के बाद शरीर को पूरी तरह सुखा लें, तभी कपड़े पहनें।
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इंफेक्शन हो जाएं यह करें उपाय
आयुर्वेद के जानकार हरिओम सिंह बताते है कि यदि फंगल इन्फेक्शन के संकेत हों तो प्रभावित जगह पर नारियल तेल का इस्तेमाल करें। इसी प्रकार एलोवेरा में भी एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीफंगल के गुण होते हैं। इसको लगाने से जलन और खुजली से राहत मिलती है। ऐसे में फंगल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए दिन में दो- तीन बार एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा फंगल इन्फेक्शन में लहसुन, अदरक और हल्दी का सेवन बहुत लाभकारी होता है। सामान्य व्यक्ति को भी इनको अपने दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए।
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फंगल इन्फेक्शन बारिश के मौसम की सामान्य बीमारी है। त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते होना, त्वचा पर पपड़ी जमना या खाल उतरना, त्वचा का लाल हो जाना, लाल रंग के छोटे-छोटे दाने होना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा खुजली भी होती है। कुछ सावधानियां रखकर इससे बचाव किया जा सकता है लेकिन यदि इन्फेक्शन ज्यादा हो जाए तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
– डॉ. श्रीपाल, चर्म रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल


