Budaun News: नेता सुन रहे न अफसर…पनबड़िया की पुलिया पर अभी खाते रहिए ठोकर

पनबड़िया बिजली घर के पास किया गया अतिक्रमण। संवाद
तीन साल से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी नहीं बनाया गया संपर्क मार्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। करीब तीन साल पहले तोड़ी गई पनबड़िया की पुलिया तो जैसे-तैसे बन गई लेकिन आज तक इसके दोनाें ओर की सड़क नहीं बन पाई। इससे लोग ठोकरें खाने को मजबूर है। बरसात में तो यहां का हाल और बुरा हो जाता है। रही-सही कसर सड़क के दोनों ओर किए गए कब्जे पूरे कर देते हैं।
पनबड़िया पर जलभराव की समस्या के निदान के लिए नगर पालिका ने अगस्त- 20 में विद्युत उपकेंद्र के सामने बनी पुलिया तोड़ दी थी। लगभग तीन महीने तक पुलिया टूटी रहने से लोगों का इधर से निकलना बंद रहा। फिर जैसे-तैसे तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत के हस्तक्षेप पर पुलिया तो बना दी गई, लेकिन उसके दोनों तरफ की सड़क बनाना नगर पालिका प्रशासन भूल गया।
मजबूरन लोग नाला काटकर बनाए गए पानी के अस्थायी निकास के ऊपर पटिया डालकर निकलते रहे। पालिका के मुताबिक ठेकेदार को इस संबंध में कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बताया जाता है कि इसका ठेका एक भाजपा नेता के भाई का था, जिससे कमीशनखोरी के चक्कर में मामला फंस गया।
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पहले काम करा दिया, टेंडर हुआ बाद में
पनबड़िया की पुलिया बनने में शुरू से ही पेंच फंसा रहा। बताते हैं कि जब लोगों की काफी शिकायतें तत्कालीन डीएम के पास पहुंचीं तो उन्होंने पालिका को तत्काल पुलिया बनवाने के निर्देश दिए। डीएम के आदेश के बाद पालिका ने काम तो शुरू करा दिया लेकिन इसका टेंडर नहीं निकाला गया। अगस्त- 20 में तोड़ी गई पुलिया तो तीन-चार माह बाद बना दी गई लेकिन उसका टेंडर जनवरी- 21 में निकाला गया। इसी झाम के चलते पुलिया और सड़क निर्माण के काम में झोल फंसा रहा।
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तत्कालीन पालिकाध्यक्ष और नगर विकास मंत्री भी पूरा नहीं करा सके काम
जिस समय पुलिया तोड़ी गई थी उस समय दीपमाला गोयल पालिकाध्यक्ष थीं जबकि सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता नगर विकास मंत्री थे। दोनों ही सत्ताधारी पार्टी भाजपा से जुड़े थे इसलिए जनता को उनसे काफी उम्मीद थी, लेकिन सैकड़ों बार मांग करने के बाद भी समस्या का कोई निदान नहीं हो सका और लोगों को निराशा ही हाथ लगी।
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अतिक्रमण से बुरा हाल, टैक्सी स्टैंड कोढ़ में खाज
अनुमान के अनुसार यहां करीब 35-40 फुट चौड़ी सड़क है लेकिन दोनों और फैले अतिक्रमण ने इसे संकरा कर 18-20 फुट में समेट दिया है। इस रोड पर कुछ कुम्हारों के घर हैं जो सड़क पर ही रखकर अपने चाक चलाते हैं। इसके अलावा उनके बनाए कुल्हड़ आदि भी रोड पर रखे रहते हैं। यहीं आग जलाकर कच्चे बर्तनों को पकाया जाता है। इसके अलावा कई खोखे रखे हैं जो सड़क घेरे हैं। कुछ समय पहले यहां अवैध टैक्सी स्टैंड भी बना दिया गया जो मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद हटाया नहीं जा सका। बारिश में तो इस रोड पर जलभराव और कीचड़ से हाल बेहाल हो जाता है।
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सड़क पर कब्जा, घेरकर बना ली पार्किंग
इसी रोड पर एक गारमेंट्स और एक प्राइवेट अस्पताल भी है। उनके संचालकों ने करीब आधी से ज्यादा सड़क घेर रखी है। इनके बोर्ड तो सड़क पर लगे ही हैं, साथ ही यहां आने वाले वाहन भी यहां दिन भर खड़े रहते हैं। निजी वाहन भी यहां खड़े कर दिए जाते हैं। लोगों का कहना है कि विरोध करने पर ये लोग अभद्रता पर उतर आते है।
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इस पुलिया से जुड़ी सड़क को निर्माण कार्यों के प्रस्तावों में शामिल किया गया है। जल्द ही आगे की कार्रवाई कर इसका निर्माण करा दिया जाएगा ताकि लोगों की परेशानी दूर हो सके।
– डॉ. दीप कुमार वार्ष्णेय, ईओ नगर पालिका

पनबड़िया बिजली घर के पास किया गया अतिक्रमण। संवाद

पनबड़िया बिजली घर के पास किया गया अतिक्रमण। संवाद