Budaun News: अफसरों को गुमराह किया- हथौड़ी तेज लगने से धंसीं आंखें… दोबारा पोस्टमार्टम ने खोल दी चोरी
बदायूं। महिला के शव से आंखें निकालने की शिकायत के बाद दोबारा पोस्टमार्टम शुरू होने से पहले तक भी कर्मचारी अफसरों को गुमराह करते रहे। चूहों के कुतरने के दावों के बीच बॉडीबैग में एक भी छेद न देखकर डीएम-एसएसपी ने सवाल किया था कि आंखें कहां हैं? इस पर कर्मचारियों ने कहा था- पोस्टमार्टम के वक्त हथौड़ी जोर से लगने से आंखें अंदर धंस गईं। इसके बाद दोबारा पोस्टमार्टम हुआ और रिपोर्ट आई तो आंखों की जगह सिर्फ खून के थक्के पाए गए। आंखें धंसने जैसे किसी तथ्य का दूसरी रिपोर्ट में जिक्र ही नहीं मिलता।
महिला पूजा के भाई राजकुमार व अन्य परिजनों के हंगामे के बाद डीएम के आदेश पर सोमवार रात ही शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। तब वहां डीएम-एसएसपी समेत कई अधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक इन अफसरों ने एहतियातन पहले शव और बॉडीबैग की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी कराई। उस दौरान बॉडीबैग में एक भी छेद नहीं मिला। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की तह तक जाने के लिए कर्मचारियों से आंखों के बारे में पूछा, तब बताया गया कि पोस्टमार्टम के दौरान हथौड़ी तेज लग गई, जिससे महिला की आंखें अंदर धंस गईं। कर्मचारियों के ऐसा बताने पर कहा गया कि अगर ऐसा है तो अंदर धंसी हुई दिखाओ। मगर आंखों की जगह पर काफी खून जमा हुआ ही पाया गया, आंखें नहीं।
पोस्टमार्टम से पहले तक आंखें होने का भाई ने भी किया दावा
पूजा के भाई राजकुमार ने भी यह दावा किया है कि बाॅडीबैग में एक भी छेद नहीं था, यानी चूहा या अन्य कोई जानवर शव तक नहीं पहुंचा। राजकुमार के अनुसार दोबारा पोस्टमार्टम के बाद परिवार वालों ने महिला के शव के साथ बॉडीबैग को भी जला दिया लेकिन साक्ष्य के तौर पर उसके वीडियो और फोटो पुलिस के पास मौजूद हैं। राजकुमार के मुताबिक पाेस्टमार्टम से पहले उन्होंने पूजा की दोनाें आंखों को देखा था लेकिन जब पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव बैग से बाहर निकाला गया तो आंखें गायब थीं।
अलापुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुतरई निवासी राजकुमार का कहना है कि उनकी बहन की मौत 10 दिसंबर को हुई थी। अगले दिन 11 दिसंबर को दोपहर के समय शव का पहला पोस्टमार्टम हुआ। वह और उनके परिवार वाले ही मोर्चरी के फ्रीजर से शव को निकालकर लाए थे। पूजा का शव जिस बॉडीबैग में रखा था, उसमें चेहरे के सामने पारदर्शी पन्नी लगी थी। उससे पूजा का चेहरा और उनकी आंखें साफ दिखाई दे रही थीं। इसके बाद शव को अंदर रखवाने के बाद पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने परिवार वालों को बाहर निकालकर चैनल बंद कर दिया। इसके बाद क्या हुआ, उन्हें नहीं पता चल सका।
राजकुमार का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई अंदाज नहीं था कि पोस्टमार्टम के दौरान पूजा की आंखें निकाल ली जाएंगी। इसलिए पोस्टमार्टम होने के बाद बिना कुछ देखे बॉडीबैग में रखे शव को घर ले गए। पोस्टमार्टम के बाद बॉडीबैग के ऊपर काली पन्नी लपेट दी गई थी। वह तो घर पर शव बाहर निकालने पर आंखें गायब देखी गईं।
खड़े हो रहे कई सवाल
-हथौड़े का तेज प्रहार होने से आंख धंस भी सकती है, मगर ऐसा होना मुश्किल ही है कि दोनों ही आंखें धंसे।
-दोबारा पोस्टमार्टम के वक्त शव सामने होने के बावजूद कर्मचारियों ने आंखें चूहों के कुतरने की बात क्यों नहीं कही, आखिर क्यों धंसने का तर्क दिया।
-पहला पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पहले से आंखें गायब होने की बात कह रहे थे, उन्होंने भी आखिर क्यों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं किया।