बदायूं

Budaun News: ‘गंगा मैया माफ करियो भूल-चूक हमार… फिर आवेंगे तुम्हारे द्वार’

Connect News 24

Mother Ganga, please forgive our mistakes, we will come to your door again

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

कादरचौक। मेला ककोड़ा में परिवार सहित कई दिन प्रवास करने के बाद बुधवार दोपहर से कल्पवासियों के लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। कल्पवासियों ने सुबह गंगा स्नान किया। गंगा मैया से जाने-अनजाने हुईं अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगी और अगले साल फिर बुलाने की कामना की। लौटने से पहले मेले से अपनी जरूरत का सामान खरीदा की।

कल्पवासियों के मेले से लौटने का सिलसिला शुरू होने के साथ ही गंगा तट पर बसा तंबुओं का शहर सिमटने लगा है, लेकिन अब मेले में आसपास गांवों के लोगों का आना शुरू हो गया हैै। ग्रामीण क्षेत्रों से भारी भीड़ जुटने से मेले में रौनक बनी हुई है। गांव-देहात के लोग घर-गृहस्थी के साथ ही खेती में काम आने वाले परंपरागत उपकरण खरीद रहे हैं।

मेले से बुधवार दोपहर बाद कल्पवासियों की तेजी से वापसी शुरू हुई। सुबह गंगा स्नान कर कल्पवासी अपने डेरे-तंबू समेटने और उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लादने में जुट गए। कल्पवासियों के ट्रैक्टर-ट्रालियों, घोड़ा-बुग्गी और कार आदि वाहनों से वापसी का सिलसिला शुरू हुआ तो कुछ जगह जाम की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, कल्पवासी प्रतिपदा को मेले से वापसी नहीं करते हैं, लिहाजा बुधवार को द्वितीया पर ही उनके घर लौटने का क्रम शुरू हुआ।

कल्पवासियों की वापसी से मेले का आवासीय क्षेत्र सूना होने लगा है, लेकिन हाट क्षेत्र में पहले जैसी रौनक है। आसपास गांवों के लोगों के साथ ही गंगा पार कासगंज के गांवों से भी ग्रामीण मेले में पहुंचने लगे है। इससे दुकानदारों की अच्छी दुकानदारी होने की उम्मीद बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने मेले का भरपूर लुत्फ उठाया। पहले गंगा में डुबकी लगाकर प्रसाद बांटा। इसके बाद खेल तमाशे का आनंद लिया। मीना बाजार में सबसे ज्यादा भीड़ रही।

सजे रह गए मंडलीय अधिकारियों के कैंप

इस बार मिनी कुंभ मेला ककोड़ा में प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राजनेता तक नहीं पहुंचे। इसकी वजह से जिला पंचायत द्वारा तैयार कराए गये कॉटेज और आलीशान कैंप सूने पड़े रहे। सिर्फ पूर्णिमा को ही कुछ नेता औपचारिकतावश पहुंचे। जिला पंचायत का कैंप कार्यालय भी सन्नाटे में डूबा रहा। अनेक विभागों की प्रदर्शनी में भी केवल एक दिन की ही औपचारिकता निभाई गई। स्काउट-गाइड का कैंप भी अब उखड़ गया है।

मेला कोतवाली की जीडी में दर्ज नहीं हुआ कोई केस

मेले में अब तक शांति बनी हुई है। इस बात की गवाह मेला कोतवाली की जीडी है। इसमें बुधवार तक एक भी केस दर्ज नहीं हुआ, जबकि मेले में पहले दिन से अंतिम दिन तक जमकर जुआ हुआ। यहां तक कि फायरिंग भी हुई, लेकिन पुलिस ने उसे आतिशबाजी बताकर खारिज कर दिया। प्रतिपदा की रात मेला ककोड़ा में जुआरियों के फड़ लगे। खुलेआम लाखों का जुआ हुआ, लेकिन पुलिस निगाहें फेरे रही।

उत्कृष्ट सेवा के लिए पुरस्कृत हुए स्काउट-गाइड

स्काउट संस्था के तत्वावधान में चल रहे खोया-पाया शिविर में अब तक स्काउट टीमों ने 317 बच्चों और बुजुर्गों को उनके परिवारों से मिलाया है। डूबतों को बचाने, उठाईगीरों, मनचलों पर पैनी नजर रखने और मेले में श्रेष्ठ अनुशासन बनाने में योगदान देने के लिए श्री दाताराम इंटर कॉलेज ललुआनगला और असरासी का स्काउट दल सर्वश्रेष्ठ रहा। अध्यक्ष महेशचंद्र सक्सेना ने गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। जिला ट्रेनिंग कमिश्नर संजीव शर्मा के नेतृत्व में स्काउट्स ने मेले से लौटने से पहले गंगा किनारे सफाई अभियान चलाया। श्रद्धालुओं द्वारा गंगा तट पर की गई गंदगी को एकत्र कर दूर फिंकवाया। मूर्तियों को गड्ढा खोदकर दबाया।

गायत्री परिवार ने किया दीप यज्ञ

अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में निर्मल गंगा जन अभियान के तहत गायत्री परिजनों ने गंगा को स्वच्छ बनाने का संकल्प लेकर सफाई अभियान चलाया। श्रद्धालुओं ने लोक कल्याण के लिए गायत्री और महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुतियां समर्पित की। मां गंगा के विराट स्वरूप की आरती के बाद दीप यज्ञ किया गया।

अभिभावकों के मोबाइल में डाउनलोड कराए एप

मेले में बेसिक शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी में निपुण लक्ष्यों के जादू ने लोगों को हतप्रभ कर दिया। प्रदर्शनी में शिक्षकों, अभिभावकों को निपुण लक्ष्य के बारे में समझाते हुए उनके मोबाइल में निपुण लक्ष्य एप डाउनलोड कराया गया। विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए बनाए गए जादू के उपकरण लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान शिक्षक प्रवीण कुमार, विवेक द्विवेदी, जाकिर अली खान, हृदयेश चंद्र माथुर, गिरीश पाली, सतेंद्र कुमार, कामेंद्र सिंह यादव आदि मौजूद रहे।

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद

मेला ककोड़ा में घोड़े के सजाने सामान खरीदते लोग। संवाद


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