बदायूं

Budaun News: लापरवाही या मिलीभगत… अभिलेखों से हटाया गया था किसान का नाम

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खतौनी अपडेट होने के बावजूद नहीं हटाया गया विक्रेता का नाम

लेखपाल बोले- नायब तहसीलदार कोर्ट से हुई थी दाखिल खारिज, लेखपाल की भूमिका नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। नगला शर्की के किसान की आत्महत्या के मामले में लेखपालों की तैनाती के अलावा एक और मामला सामने आया है। सवाल यह है कि आखिर वर्ष 2017 के बाद 2023 में किसान रूम सिंह का नाम राजस्व विभाग के अभिलेखों से कैसे हटा दिया गया। अब जहां लेखपाल खुद को निर्दोष बता रहे हैं, तो वहीं नायब तहसीलदार का कहना है कि उसमें विक्रेता का नाम मौजूद था, जिससे एकता वार्ष्णेय के नाम दाखिल खारिज कर दिया गया।

ग्राम नगला शर्की के किसान रूम सिंह ने नायब तहसीलदार और लेखपाल से परेशान होकर 22 जून को विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी थी। रूम सिंह पिछले कई महीनों से सदर तहसील के चक्कर लगा रहे थे। दरअसल कुछ माह पहले उनकी दाखिल खारिज निरस्त कर दिया गया था। उनके स्थान पर जमीन के अभिलेखों में एकता वार्ष्णेय और उनकी नाबालिग बेटी का नाम दर्ज कर लिया गया था। तब से रूम सिंह काफी परेशान थे।

वह अधिकारियों से लगातार दोबारा सुनवाई की मांग कर रहे थे। जब उनकी नहीं सुनी गई तो उन्होंने 22 जून को तहसील सदर में ही विषाक्त पदार्थ खा लिया। बाद में उनकी बरेली में उपचार के दौरान मौत हो गई।

अब बताया जा रहा है कि राजस्व विभाग के अभिलेखों से विक्रेता कुलदीप राठौर और उसकी मां मुन्नी देवी का नाम नहीं हटाया गया था जबकि खतौनी अपडेट होने के बाद विक्रेता का नाम हटा दिया जाता है। पांच नंबर के कॉलम का आदेश हटाकर दो नंबर कॉलम में दर्ज कर दिया जाता है तब क्रेता जमीन का असली हकदार माना जाता है लेकिन इस प्रकरण में ऐसा नहीं किया गया।

इसमें तहसीलदार प्रशासन की लापरवाही रही या फिर मिलीभगत से किसान की दाखिल खारिज निरस्त किया गया, अभी इसकी जांच चल रही है। एडीएम प्रशासन इसकी जांच कर रहे हैं।

इस मामले में अभी जांच चल रही है। इससे कुछ कहना उचित नहीं है। यह जरूर पता है कि इस सभी पहलुओं पर जांच चल रही है। जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी

– एसपी वर्मा, एसडीएम सदर

जब इस मामले का दाखिल खारिज हुआ तब विक्रेता का नाम खतौनी में मौजूद था। दाखिल खारिज के दौरान विक्रेता का नाम देखा जाता है। इससे एकता वार्ष्णेय के नाम दाखिल खारिज हो गया। जब किसान ने पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र दिया तो उसकी शिकायत पर सुनवाई शुरू हुई। इसमें संबंधित लोगों को नोटिस दिया गया। इसमें 25 जून को सुनवाई होनी थी लेकिन उससे पहले ही किसान ने आत्महत्या कर ली।

– आशीष सक्सेना, नायब तहसीलदार

इस प्रकरण में जैसा मेरी जानकारी में है, दाखिल खारिज के दौरान लेखपाल के बयान दर्ज नहीं कराए गए थे। अगर उसके बयान दर्ज होते तो शायद दाखिल खारिज नहीं होता। अब सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद पता चल जाएगा।

– भोजराज सिंह, जिलाध्यक्ष लेखपाल संघ


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