Budaun News: बदलते मौसम में बढ़ी मच्छरों की तादाद, मलेरिया के केस 36
बदायूं। मौसम में परिवर्तन के साथ ही मच्छर जनित बीमारियां भी बढ़ने लगी हैं। हालांकि डेंगू का अभी कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन मलेरिया के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जनवरी से अब तक मलेरिया के 36 मरीज सरकारी आंकड़े में दर्ज हो चुके हैं, जबकि प्राइवेट लैब पर इनकी संख्या सैकड़ों में है।
मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते मरीजों की जो संख्या सामने आई है, वह चिंताजनक है। मलेरिया विभाग मच्छर जनित बीमारियों पर काबू करने का दावा कर रहा है, लेकिन गांव में गंदगी और जागरूकता के अभाव के चलते मच्छरों का लार्वा मिलने लगा है। हर साल गर्मी का सीजन शुरू होते ही मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ते ही मच्छर जनित बीमारियां भी बढ़ने लगती हैं। मई, जून से बीमारियां फैलती हैं, लेकिन इस बार समय से पहले ही मलेरिया के मरीज सामने आने लगे हैं।
मलेरिया के मरीज जनवरी में तीन आए थे। फरवरी से लेकर मार्च तक इनकी संख्या 12 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 36 हो गई है। दिन ब दिन मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, वह भी ऐसे समय में, जब विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा है। अभियान का असर गांवों में दिखाई नहीं दे रहा है। गांवों में मच्छरों पर रोकथाम के लिए न तो फागिंग कराई जा रही है और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है।
ये इलाके हुए प्रभावित
इस साल मलेरिया के जो केस सामने आए हैं, उन इलाकों को मलेरिया प्रभावित घोषित किया जा रहा है। इस साल म्याऊं, दातागंज, समरेर, उझानी और सैदपुर में मलेरिया के केस सामने आने की वजह से मलेरिया प्रभावित घोषित किया गया है। यहां पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
मच्छरों की प्रयोगशाला के कार्य की गति भी हुई धीमी
मच्छरों पर शोध के लिए प्रदेश में दूसरी प्रयोगशाला यहां बन रही है। सीएमओ कार्यालय परिसर में इसका निर्माण कराया जा रहा है। इस प्रयोगशाला में मच्छरों पर शोध किया जाएगा कि मच्छर किस सीजन में कितना प्रभावशाली होता है। इसके लिए सालारपुर ब्लॉक के चार गांव चयनित किए गए हैं, उन गांवों में टीम चिह्नित घरों में एंटी लार्वा का छिड़काव शाम को करेंगी और सुबह मरे मच्छरों को लाकर उनपर शोध किया जाएगा। इसके अलावा उन गांवों में जिंदा मच्छरों को पकड़कर भी देखा जाएगा कि गर्मी, बरसात और सर्दी में मच्छरों में क्या बदलाव आता है। तीनों ही सीजन में पकड़े गए मच्छरों पर शोध करने की यह अच्छी योजना है, लेकिन यहां प्रयोगशाला का निर्माण अब धीमा हो गया है।
तीन साल में मच्छर जनित बीमारियों का आंकड़ा
वर्ष 2020
– मलेरिया के मरीजों की संख्या – 1085
– फैल्सीपेरम के मरीजों की संख्या – 1902
– डेंगू के मरीजों की संख्या – सात
वर्ष 2021
– मलेरिया के मरीजों की संख्या – 1506
– फैल्सीपेरम के मरीजों की संख्या – 159
– डेंगू के मरीजों की संख्या – 471
वर्ष 2022
– मलेरिया के मरीजों की संख्या – 1279
– फैल्सीपेरम के मरीजों की संख्या – 94
– डेंगू के मरीजों की संख्या – 579
मच्छर जनित बीमारियों पर काबू के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा है। मरीजों की जांच के लिए 50 हजार से ज्यादा आरडीटी किट विभाग के पास मौजूद हैं। गांवों में एंटी लार्वा के छिड़काव के लिए कीटनाशक दवाएं मुहैया करा दी गई हैं। टीमें लगातार गांवों में निगरानी कर रही हैं। – डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ



