बदायूं

Budaun News: तटबंध पर रह रहे लोगाें को खाने के पड़ने लगे लाले

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People living on the embankment started having to eat

तौफी नगला में पानी से होकर गुजरना पड़ रहा ग्रामीणों को। संवाद

बदायूं। सहसवान में गंगा नदी काफी कटान कर रही है। खासतौर पर तौफी नगला गांव कटान की वजह से काफी ज्यादा प्रभावित है। ऐसे में प्रशासन की ओर से गांव को पिछले दिनाें खाली करा दिया था। इसके बाद में ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा मुहैया कराई जगह पर नहीं गए, बल्कि पास में स्थित गंगा-महावा तटबंध पर अपना डेरा जमा लिया, लेकिन अब उनके सामने खाने के लाले पड़ने पड़े हैं।

गंगा का घटबा-बढ़ता जलस्तर इन दिनों अधिकारियों से लेकर ग्रामीणों तक के लिए मुसीबत बना हुआ है। सबसे ज्यादा दिक्कत सहसवान के तौफी नगला गांव के लोगों को आ रही है। गांव में हो रहे कटान की वजह से गांवाें ने प्रशासन के कहने पर आठ अगस्त को गांव खाली करना शुरू कर दिया था। एक से दो दिन में लगभग पूरा गांव खाली हो गया है। तब से ग्रामीण गंगा-महाबा तटबंध पर रह रहे हैं। शुरुआत में ग्रामीणाें के पास खाने-पीने का सामान था। उससे उन्होंने अपना काम चला रहे हैं, साथ ही कुछ सामान प्रशासन ने मुहैया कराया था, लेकिन अब ग्रामीणों के पास खाने के लिए सामान नहीं बचा है। वहीं, पशुओं के लिए भी चारे के संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से खाने-पीने की वस्तुओं और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है।

गंगा में छोड़ा अब तक का सार्वाधिक मात्रा में पानी

– इसके दो दिन बाद आने की उम्मीद, बढ़ सकती है तटीय इलाकों के लोगों की दिक्कत

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। गंगा नदी पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सोमवार को बिजनौर से 3,88,080 और हरिद्वार से करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे दो दिन बाद तटीय इलाकों में मुसीबत और बढ़ सकती है। क्योंकि पानी की यह मात्रा इस बार सबसे अधिक है। पथरामई तटबंध पर पहले से कटान काफी ज्यादा हो गया है। वहीं, अब छोड़े गए पानी के आने पर तेजी से कटान करेगा। ऐसे में तटबंध को दिक्कत हुई तो सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में सकते हैं।

जिले में पिछले एक माह से गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसकी वजह से जिले के 29 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सहसवान क्षेत्र के आसे नगला, परशुराम नगला, वीर सहाय नगला, खागी नगला, तौली नगला, उसहैत के कमले नगला, रैपुरा, असमया रफतपुर, ठाकुरी नगला, जटा, प्रेमी नगला, जसवंत नगला, कमलू नगला, ललोमई, बेहटी, घस नगला आदि के हालात पहले खराब चल रहे हैं। इन गांवों में करीब 15 दिन पहले पानी भर गया था, जो अभी तक नहीं निकाला है। हालांकि बाढ़ का पानी कम होने से वह खेतों तक ही सीमित हो गया हो गया, लेकिन सोमवार को हरिद्वार के साथ-साथ बिजनौर से भी इस सीजन का सबसे अधिक पानी छोड़ा गया है। इसकी वजह से इन गांवों के हालात पहले से भी ज्यादा बिगड़ सकते हैं।

पथरामई तटबंध ने बढ़ाई धड़कनें

एक माह से गंगा नदी में बाढ़ आई हुई है। इसका सीधा असर पथरामई तटबंध पर दिखने को मिल रहा है। वहां पर गंगा तेजी से कटान कर रही है। हालांकि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने कटान रोकने के लिए दिनरात तेजी से काम कर रहे हैं, लेकिन जिस तेजी से पानी हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बैराजों से छोड़ा गया है, उससे अधिकारियों की दिक्कत बढ़ा दी है।

बैराजों से छोड़ा गया पानी

– नरौरा-2,09,060 क्यूसेक

– बिजनौर-3,88,080 क्यूसेक

– हरिद्वार- 2,96,826 क्यूसेक

जिले में गंगा काफी समय से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बैराजों से पानी पहले की अपेक्षा ज्यादा छोड़ा गया है। इसको लेकर पूरी तरह से तैयार है। कहीं पर किसी को कोई परेशान नहीं होने दी जाएगी। – नेषपाल, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड

तौफी नगला में पानी से होकर गुजरना पड़ रहा ग्रामीणों को। संवाद

तौफी नगला में पानी से होकर गुजरना पड़ रहा ग्रामीणों को। संवाद

तौफी नगला में पानी से होकर गुजरना पड़ रहा ग्रामीणों को। संवाद

तौफी नगला में पानी से होकर गुजरना पड़ रहा ग्रामीणों को। संवाद


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