Budaun News: नकली घी सप्लाई के लिए लोगों को जोड़ा था समूह से
दातागंज (बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र के बराही गांव में सिंथेटिक पनीर और नकली देसी घी बनाने वाला इदरीश बहुत शातिर है। उसने देसी घी सप्लाई कराने के लिए भी कई लोगों को अपने समूह में जोड़ रखा था। वह उन्हें पशुपालक बनाकर जिले के अलग-अलग इलाकों में भेजता था। लोग भी उनसे घी खरीद लेते थे, लेकिन इस फर्जीवाड़े में कभी इदरीश का नाम सामने नहीं आया।
जिले के अधिकतर पशुपालक अब सिर्फ दूध बेचते हैं। वह या तो स्वयं दूध बेचने जाते हैं या फिर उनके घरों में दूधिया आकर दूध खरीदकर ले जाते हैं। इससे घरों में देसी घी निकालने की परंपरा लगभग खत्म होती जा रही है। अब तो पूजा-पाठ के कार्यक्रमों में भी बाजार का देसी घी प्रयोग हो रहा है।
हालांकि कुछ पशुपालक ऐसे भी हैं, जो अपने घर का देसी घी प्रयोग कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा बराही गांव के इदरीश ने उठाया। उसने पाॅम ऑयल और कोकोनट ऑयल से नकली देसी घी बनाने का फॉर्मूला सीख लिया था। इससे वह थोक में ही रजनी ब्रांड का पॉम ऑयल और अल्फा ब्रांड का कोकोनट ऑयल खरीद लेता था। फिर थोक के हिसाब से उसे सप्लाई कराता था।
यह घी सप्लाई कराने का भी उसका अलग तरीका था। उसने कई ऐसे लोगों को जोड़ लिया था, जो उसके इशारे पर पशुपालक बनकर नकली देसी सप्लाई करने निकल जाते थे। एक-एक व्यक्ति पांच-पांच किलो के हिसाब से घी ले जाता था। वह जहां भी देसी घी ले जाता था, वहां यह बताता था कि यह देसी घी उसके घर का है, उसने स्वयं घी निकाला है।
इससे तमाम लोग उनकी बातों में आ जाते थे। उसके लोगों ने शहर में कई जगह ठिकाने भी बना लिए थे, जहां कमीशन पर देसी घी सप्लाई किया जाता था। साप्ताहिक बाजारों में भी यह नकली घी सप्लाई कराया जाता था। इसका खुलासा भी छापा मारी के दौरान हुआ था जबकि अधिकारियों ने नकली घी बनाने की विधि और उसे सप्लाई करने के बारे में पूछताछ की, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से विभागीय नियमों के तहत ही कार्रवाई की गई।
उत्तराखंड और दिल्ली भी जाता था सिंथेटिक पनीर
बराही गांव के इदरीश का पनीर केवल बरेली के बहेड़ी में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भी सप्लाई होता था। इसके लिए वह निजी वाहनों को प्रयोग करता था, लेकिन कभी रास्ते में पनीर नहीं पकड़ा गया। उसके यहां से ही शादी कार्यक्रम और तमाम दुकानों पर भी पनीर पहुंच रहा था।