Budaun News: अनदेखी से खेल मैदान बर्बाद… प्रतिभाएं झाड़-झंखाड़ों में गुम

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद
बदायूं। जिले में गंगा किनारे बसी ग्राम पंचायतों में खेल प्रतिभाएं विकसित करने के लिए लाखों रुपये खर्च करके खेल मैदान बनाए गए थे। तार फेंसिंग के नाम पर ही करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन न तो इनकी देखभाल हो सकी और न ही कभी खेल। ऐसे में ये मैदान अब अपना स्वरूप खो चुके हैं। कहीं घास खड़ी है तो कहीं कब्जे हो चुके हैं।
प्रदेश के जिन जिलों से होकर गंगा निकल रही है, वहां तटवर्ती गांवों में शासन ने खेल मैदान बनाने के निर्देश दिए थे। यहां जिला प्रशासन ने गंगा किनारे के 41 गांवों का खेल मैदान विकसित करने के लिए चयन किया। मनरेगा के माध्यम से मैदान बनवाए गए थे। बाद में इन्हें ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिया गया। ग्राम पंचायतों ने वहां तार फेंसिंग कराई। एक खेल मैदान पर करीब एक लाख रुपये खर्च हुए थे, लेकिन ग्राम पंचायतों ने इनकी देखभाल पर ध्यान नहीं दिया। अब अधिकांश मैदानों पर घास उग आई है।
युवा मंगल दलों को कराने थे खेल
शासन के निर्देश पर सभी ग्राम पंचायतों में युवा मंगल दलों का गठन किया गया था। इनके माध्यम से इन मैदानों पर खेलों का आयोजन कराया जाना था। बॉलीवॉल, कबड्डी, खो-खो आदि खेलों में ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना था। खेल मैदानों के बदहाल हो जाने से युवाओं को इनका लाभ नहीं मिल रहा है। हालांकि युवा कल्याण विभाग का दावा है कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में युवा मंगल दलों का गठन किया जा चुका है। समय-समय पर ग्राम पंचायतों में बॉलीवाल, कबड्डी, खो-खो आदि प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं।
इन गांवों में बनाए गए हैं खेल मैदान
जिले के खजुरारा पुख्ता, भैंसोड़ा, हुसैनपुर पुख्ता, सराय स्वाले, सरौता, चंदनपुर पुख्ता, नानखेड़ा पुख्ता, पिपरौल पुख्ता, डकारा पुख्ता, औरंगाबाद टप्पा जामनी, भीकमपुर टप्पा जामिनी, खरकवारी मानपुर पुख्ता, नगला वरन, नगला कोतल, नरसैना, नसीरपुर गैसू, सुजातगंज वेला, सिठौला पुख्ता, पालपुर, जामिनी, रसूलपुर वेला, अव्वूनगर समेत 41 गांवों में खेल मैदान बनाए गए हैं।
युवा बोले- चाहकर भी खेलों में नहीं बढ़ पा रहे आगे
-गांव में बने खेल मैदान पर ग्राम पंचायत की अनदेखी के चलते लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसकी वजह से मैदान खेलने लायक ही नहीं बचा है। ऐसे में चाहकर भी युवा वहां खेल नहीं पाते हैं। – लक्ष्य, रसूलपुर बेला
खेल मैदान तो बना दिया गया, लेकिन इसका फायदा युवाओं को नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह यह है कि ग्राम पंचायत ने मैदान के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया है। अनदेखी की वजह से वहां घास उग आई है। -संजू, नगला वरन
-अगर खेल मैदान सही होता, तो गांव में खेलों को बढ़ावा मिलता। युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा निखारकर आगे बढ़ पाते। खेल मैदान बनने के बाद किसी ने इसकी तरफ नहीं देखा। यहां पर बड़ी-बड़ी घास उग आई है, इससे यह किसी काम का नहीं रह गया है। – आदित्य सक्सेना, खजुरारा
– क्रिकेट और बॉलीवाल में रुचि है। खेल मैदान बनने के बाद कुछ उम्मीद जगी थी। यहां पर प्रधान ने चहारदीवारी का निर्माण कराया। झूले भी लगवाए, लेकिन खेलों का आयोजन नहीं होने के कारण सब कुछ बेकार है। – बच्चू सिंह, पिपरौल
– गांवों में जो खेल मैदान बनाए गए है, वहां पर ग्राम पंचायतें साफ-सफाई रखें। किसी तरह का कब्जा नहीं होना चाहिए। अगर कोई कब्जा करने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद

रसूलपुर बेला में खेल मैदान की स्थिति। संवाद