Budaun News: प्रधानों का दावा- गावों में कराया कीटनाशक का छिड़काव, ग्रामीण कह रहे- मच्छर तो मरे नहीं
बदायूं। गांवों में साफ-सफाई के निर्देश भले ही शासन-प्रशासन देता रहे लेकिन इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा। इसकी वजह सिस्टम का नकारापन है। गावों में प्रधानों ने धनराशि मिलने के बाद भी कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कराया है। हालांकि दावे तमाम किए जा रहे हैं।
गांवों में एक के बाद एक मच्छरजनित बीमारियों से हो रहीं मौतें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। कुछ एक अपवादाें को छोड़ दें तो अधिकांश गावों में स्थिति एक जैसी है। यही वजह है कि बुखार के कारण जिले में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि घर-घर लोग बीमार हैं।
शासन की ओर से ग्राम समितियों को स्वच्छता संबंधी कामों के लिए हर साल 10 हजार रुपये भेजे जाते हैं। इस खाते का संचालन एएनएम/ आशा और प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। जिले की 1037 ग्राम पंचायतों को 1.37 करोड़ रुपये दिए गए। इस रकम से प्रधान गांवों में छिड़काव के लिए कीटनाशक खरीद सकते थे, लेकिन 90 फीसदी से ज्यादा प्रधानों ने राशि खुर्दबुर्द कर ली।
कीटनाशक का छिड़काव ही नहीं कराया गया। हालांकि दावा सभी प्रधान कीटनाशक का छिड़काव कराने का कर रहे हैं, जबकि गांव वालों का कहना है कि अगर दवा छिड़की गई है तो फिर मच्छरों से छुटकारा क्यों नहीं मिला। मच्छर पहले से ज्यादा कैसे बढ़ गए। प्रधानों की मनमानी कार्यप्रणाली के चलते गांवों में गंदगी की समस्या विकराल है और यही मच्छरजनित रोगों का कारण बन रही है।
वर्तमान में हर गांव में डेंगू, मलेरिया का कहर है। जिले में दो सौ से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग जिले में डेंगू से सिर्फ छह मौतें होने की बात कह रहा है। बाकी मौतों को की वजह दूसरी बीमारियां बताई जा रही हैं।
फाॅगिंग मशीन खरीदने में भी किसी प्रधान की रुचि नहीं
कुछ साल पहले तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह के समय में प्रधानों को फॉगिंग मशीन खरीदने के निर्देश दिए गए थे। एक अनुमान के अनुसार, इसके बाद करीब 80 प्रतिशत प्रधानों ने मशीनें खरीद ली थीं। इन प्रधानों में जो अगली बार भी प्रधान बन गए, उन्होंने तो इन मशीनों का प्रयोग किया, लेकिन अधिकांश नए प्रधानों को पुराने प्रधानों ने मशीनें दी ही नहीं। नये प्रधानों में भी ज्यादातर ने नई मशीन खरीदने में रुचि नहीं दिखाई।
गांव में गंदगी के ढेर, लोग परेशान
– प्रधानों की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते गांव गांव गंदगी के ढेर लगे हुए है। गांव में जलभराव हो रहा है जो संक्रमण फैलने का मुख्य कारण है। जिले के 25 गांव पूरी तरह से डेंगू की चपेट में हैं लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। कार्रवाई के अभाव में प्रधान और सचिव से लेकर स्वास्थ्य विभाग का अमला भी सिर्फ तमाशबीन बना है। कुंवरगांव क्षेत्र के दुगरैया, दबतोरा समेत अलापुर, वजीरगंज के नवादा, बिसौली आदि क्षेत्रों के तमाम गावों में गंदगी प्रमुख समस्या है, जिससे लोग परेशान हैं।
फैक्ट फाइल-
अब तक मिले मलेरिया पीवी मरीज- 2286
अब तक मिले मलेरिया पीएफ मरीज
अब तक मिले डेंगू के मरीज
– खाते में 10 हजार रुपये आए थे। इससे कीटनाशक दवा खरीदी गई थी। उसका छिड़काव भी गांव में करा दिया गया है। फॉगिंग मशीन खरीदने की कोई सूचना हमारे पास नहीं है और न ही इसके बारे में प्रशासन स्तर से बताया गया है। – मजाहिर अली, प्रधान उरैना
– 10 हजार रुपये शासन से मिले थे। उससे दवा लेकर छिड़काव कराया गया है। हम इस बार ही प्रधान बने हैं। फॉगिंग मशीन पूर्व प्रधान के पास है, लेकिन उनके कहने के बाद भी उन्हें मशीन नहीं दी गई है। – पवन पाठक, प्रधान नदवारी
– डेंगू के प्रकोप को देखते हुए गांव में एंटीलार्वा का छिड़काव करा दिया है, लेकिन फॉगिंग मशीन नहीं है। पड़ोस की ग्राम पंचायत से मशीन लेकर गांव के कुछ हिस्से में फॉगिंग कराई है। जल्द ही बाकी जगह पर भी फॉगिंग कराई जाएगी। – अरुण कुमार, प्रधान नवीगंज
– फॉगिंग मशीन खरीदने के निर्देश मिले थे। अधिकांश गांवों में मशीनें नहीं खरीदी गईं हैं। 10 हजार रुपये प्रधान, आशा व एएनएम के संयुक्त खाते में आते हैं, लेकिन हमारे खाते में नहीं आए। सीएमओ कार्यालय में शिकायत भी की फिर भी रुपये नहीं आए। – बीपी मौर्य, प्रधान मनवा वजीरगंज
ग्रामीण बोले – न फाॉगिंग हो रही न छिड़काव
– गांव में न तो दवा का छिड़काव कराया गया है, न ही फॉगिंग कराई जा रही है। गांव में अब तक दो लोग डेंगू ही चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। गांव में कैंप भी नहीं लगाया गया है। – सोमेश मिश्रा, बरीपुरा
– गांव में अब तक 10 लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में गोलियां बांटकर अपना कर्तव्य पूरा लिया है। गांव में फॉगिंग व लार्वानाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराया गया है। – अंकित मिश्रा, खुरर्रमपुर भमोरी
– गांव में डेंगू का प्रकोप है लेकिन स्वास्थ्य विभाग गांव में की जा रही जांचों में डेंगू की पुष्टि ही नहीं कर रहा है। प्राइवेट जांच कराने पर डेंगू बताया जा रहा है। लार्वा नष्ट करने की दवा का छिड़काव नहीं कराया गया है। न ही फॉगिंग हुई है। – जमीर अहमद, संग्रामपुर
– गांव में गंदगी से संक्रमण फैल रहा है। कीटनाशक दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। यही बजह है कि लगातार लोग डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। प्रधान की ओर से साफ-सफाई भी नहीं कराई जा रही है। – सुनील कुमार कठेरिया, दबतोरी
करीब पांच साल पहले तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह के आदेश पर प्रधानों ने फॉगिंग मशीनें खरीदी थीं। उन्हीं से गांवों में फॉगिंग कराई जानी हैै, लेकिन तमाम प्रधान इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। हमारे पास जो भी प्रधान आते हैं, उन्हें दवा दे दी जाती है। संबंधित एमओआईसी को भी दवा देते हैं, ताकि वे प्रधानों के माध्यम से इसका छिड़काव करा सकें। – योगेश सारस्वत जिला मलेरिया अधिकारी
– एएनएम और प्रधान के संयुक्त खातों में आने वाली धनराशि से स्प्रे और फाॅगिंग भी कराई जा सकती है। लगातार इसके निर्देश दिए जाते हैं कि प्रधान अपने स्तर से सफाई व्यवस्था का पूरा ध्यान रखें और इसमें लापरवाही न बरतें। जिन गांवों में डेंगू फैल रहा है, वहां अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर सफाई कराएंगे। – श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद

दबतोरा गांव में नाली में जमा गंदगी। संवाद