बदायूं

Budaun News: राखियों के बाजार ने पकड़ी रफ्तार

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Rakhi market has gained momentum

दुकान पर राखी खरीदती महिलाएं। संवाद

देर रात तक दुकानों पर लगी रही महिलाओं की भीड़, जमकर हुई खरीदारी

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ ही बाजार भी रफ्तार पकड़ने लगा है। ऐसे में सोमवार को राखी की दुकानों पर महिलाओं की देर रात तक भीड़ लगी रही। हर बार की तरह इस बार भी डिजाइनर राखियों के अलावा पतली डोरी वाली राखियों की मांग ज्यादा दिखी।

रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ ही बाजार ने रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार को भी राखियों की दुकानों पर काफी भीड़ रही। राखी विक्रेता मुकेश ने बताया कि डिजाइनर राखियों की मांग ज्यादा है। बच्चों की जिद पर महिलाएं कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां भी खरीद रहीं हैं। उन्होंने बताया कि वे कच्चा माल दिल्ली से लाते हैं और यहीं राखियां तैयार करते हैं। कुछ राखियां बनी बनाई भी मंगवाई जाती हैं।

भ्रद्राकाल में न बांधें राखी, 31 को ही मनाएं त्योहार

विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी रक्षाबंधन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं कि राक्षाबंधन पूर्णिमा तिथि श्रवण नक्षत्र में मनाने का विधान है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 11 बजे प्रारंभ हो रही है जो कि 31 अगस्त को सुबह सात बजे तक रहेगी। 30 अगस्त को प्रातः 10:59 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। उसके उपरांत पूर्णिमा तिथि लग रही है। पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही भद्रा प्रारंभ हो रही है जो कि रात्रि 9:02 बजे तक रहेगी। रात्रि काल में जनेऊ धारण करना और रक्षाबंधन बांधना निषेध है। इस कारण रक्षाबंधन 31 अगस्त पूर्णिमा उदय व्यापिनी तिथि में मनाना सही होगा। उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को प्रातः 7:07 बजे तक नूतन जनेऊ धारण करें और त्योहार मनाएं।

वाटरप्रूफ लिफाफों में रखकर बहनें भाइयों को भेज रहीं राखियां

रक्षाबंधन को लेकर डाक विभाग भी तैयार है। जो महिलाएं दूरदराज रहने वाले भाइयों के लिए राखी भेजना चाहती है, उनके लिए वाटरफ्रूफ लिफाफों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा छुट्टी वाले दिनों में भी राखियों का वितरण करने की व्यवस्था की गई है। डाक अधीक्षक देवेंद्र सिंह ने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर विभाग पूरी तरह तैयार है।

ऑनलाइन भी भेजी जा रहीं राखियां, गिफ्ट पैक मौजूद

एक समय ऐसा भी था जब लोग बाहर राखी भेजने के लिए केवल डाक विभाग पर ही निर्भर थे। धीरे-धीरे बाजार में कोरियर कंपनियां आईं और लोगों का रुझान इस ओर हो गया। शहर निवासी वंशिका कहती हैं कि उन्हें अपने भाई को बेंग्लुरू राखी भेजनी होती है। पहले वह राखी डाक या कोरियर के माध्यम से भेजती थीं, लेकिन कई बार राखी पहुंची ही नहीं। इसके अलावा पैकेट में केवल राखी ही भेज सकते थे। पर अब ऑनलाइन बाजार में राखी के साथ, रोली, चावल, चॉकलेट या मिठाई का पैकेज भी उपलब्ध है। जो आसानी से 130 से लेकर आठ सौ रुपये तक में उपलब्ध है।


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