बदायूं

Budaun News: अभिलेखों में गड़बड़ी और अधिकारियों के रुख से टूट चुके थे रूम सिंह

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Room Singh was broken due to disturbances in the records and the attitude of the officers

ग्राम नगला शर्की में मृतक किसान के परिवार से मुलाकात करता जिला कांग्रेस कमेटी का प्रतिनिधि मंडल

तहसील में विषाक्त पदार्थ खाकर किसान की मौत का मामला

– पहले निरस्त हो चुकी थी संजय रस्तोगी की दाखिल खारिज, छह साल बाद पत्नी- बेटी के नाम आई जमीन

– किसान का सवाल था दाखिल खारिज निरस्त होने के बाद भी कैसे आ गया पत्नी-बेटी के नाम भूमि

संवाद न्यूज एजेंसी

बदायूं। किसान रूम सिंह राजस्व विभाग के अभिलेखों में की गई गड़बड़ी से काफी परेशान थे। उम्मीद थी कि अधिकारी उनकी मदद करेंगे लेकिन उनके रुख ने तो उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। उन्हें लगने लगा कि उनकी मेहनत की कमाई बर्बाद हो जाएगी। जब बुरी तरह से टूटे तो सल्फास खाकर जीवन लीला समाप्त कर ली।

इस मामले में कहीं न कहीं राजस्व विभाग के अधिकारियों और लेखपाल की मिलीभगत भी सामने आई है। सवाल है कि जब संजय रस्तोगी की दाखिल खारिज पहले निरस्त हो चुकी थी, तब उसकी पत्नी और बेटी के नाम जमीन कैसे आ गई। मृतक किसान इसी बात का विरोध कर रहे थे।

ग्राम नगला शर्की निवासी किसान रूम सिंह और उनके भाई रक्षपाल सिंह ने एक जून 2016 को अपने परिवार के कुलदीप राठौर और उसकी मां मुन्नी देवी से खसरा नंबर 809 का इकरारनामा कराया था। फिर इन्हीं लोगों से 29 जून 2016 को खसरा नंबर 829 का इकरारनामा कराया। रूम सिंह के बेटे संदीप राठौर के मुताबिक उनका इकरारनामा सबसे पहले हुआ था।

इसके बाद कुलदीप और उसकी मां ने चुपके से दोनों खसरा नंबर का बैनामा संजय रस्तोगी के नाम कर दिया। इसके आधार पर संजय रस्तोगी की दाखिल खारिज भी हो गई। जब इसके बारे में रूम सिंह और उनके भाई रक्षपाल सिंह को पता चला तो उन्होंने कुलदीप व उसकी मां से बात की। फिर दोनों मां-बेटे ने रक्षपाल सिंह की सहमति पर सात मार्च 2017 को रूम सिंह के नाम बैनामा कर दिया।

जब यह मामला सदर तहसील पहुंचा तो संजय रस्तोगी की दाखिल खारिज निरस्त कर दी गई। छह नवंबर 2017 को जमीन रूम सिंह के नाम आ गई। उसके बाद रूम सिंह निश्चिंत हो गए।

बताया जा रहा है कि कुछ साल पहले संजय रस्तोगी की मृत्यु हो गई। इस वर्ष 2023 में अचानक रूम सिंह का नाम दोनों खसरा नंबरों से हटा दिया गया। उनकी जगह पर संजय रस्तोगी की पत्नी एकता वार्ष्णेय और नाबालिग ईशान रस्तोगी के नाम दर्ज कर दिए गए। इस बात से किसान रूम सिंह को झटका लगा। उसके बाद वह लेखपाल कुलदीप भारद्वाज और नायब तहसीलदार आशीष सक्सेना से मिले। कई बार उन्होंने तहसील के चक्कर लगाए लेकिन उनकी नहीं सुनी गई।

रूम सिंह डीएम को देने वाले थे शिकायती पत्र

किसान रूम सिंह लेखपाल और नायब तहसीलदार से परेशान थे। उन्होंने डीएम से भी शिकायत करने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए उन्होंने एक प्रार्थना पत्र भी टाइप कराया था। डीएम को शिकायती पत्र देते, इससे पहले वह 22 जून को तहसील आए। मामले को लेकर उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई गई। तब उन्होंने नायब तहसीलदार कोर्ट में ही विषाक्त पदार्थ खा लिया और रात में दो बजे उनकी बरेली में मौत हो गई।

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परिवार से मिला जिला कांग्रेस कमेटी का प्रतिनिधिमंडल

बदायूं। शनिवार को जिला कांग्रेस कमेटी का नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मृतक किसान के परिवार से मिला। कमेटी के अध्यक्ष ओमकार सिंह ने किसान के बेटे संदीप राठौर से सहानुभूति प्रकट की। उन्होंने कहा कि मामले में तहसील प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है। खासतौर पर लेखपाल और नायब तहसीलदार की, जिन्होंने इकरारनामा होते हुए फर्जी बैनामा अपने रिकॉर्ड में चढ़ा दिया। रूम सिंह को काफी परेशान किया गया। इसमें संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में जितेंद्र कश्यप, सुरेश राठौर, वीरेश तोमर, डॉ. राम रतन पटेल, प्रदीप राठौर, अजीत सिंह यादव, इगलास हुसैन और मोरपाल प्रजापति शामिल रहे।

जाम लगाने के मामले में मृतक के नाम भी कर दी एफआईआर

सिविल लाइंस क्षेत्र की जवाहरपुरी पुलिस चौकी इंचार्ज कमलेश सिंह ने जाम लगाने के मामले में जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसमें एक मृतक का नाम भी शामिल है। संदीप राठौर ने बताया कि राममूर्ति सिंह पुत्र चुन्नी सिंह की कुछ साल पहले मृत्यु हो चुकी है। कई नाम गलत दर्ज किए गए हैं। उन्होंने तो शांतिपूर्वक अपनी मांग रखी थी। इसके पुलिस और तमाम लोगों के पास वीडियो और फोटो हैं। इसके बावजूद पुलिस ने कई गंभीर धाराएं लगाई हैं।

नियम तो यही कहता है कि जिसका बैनामा पहले होता है। उसकी दाखिल खारिज कर दी जाती है लेकिन इस मामले में फाइल मेरे सामने नहीं आई है। अब फाइल देखने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। हालांकि मामले की जांच चल रही है। उसमें सबकुछ साफ हो जाएगा। जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

– करनवीर सिंह, तहसीलदार सदर

इस घटना के संबंध में आज ही जांच को पत्र मिला है। सात दिन का समय दिया गया है। मामले की जांच की जाएगी। जो सच्चाई सामने आएगी। उसके अनुसार कार्रवाई होगी।

– विजय कुमार सिंह, एडीएम प्रशासन


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