Budaun News: शिकायतों की भरमार पर समाधान अधर में
बदायूं। जिले में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल आईजीआरएस (समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली) केवल नाम का रह गया है। इस पर शिकायत करना और न करना एक बराबर है। हकीकत यह है कि अधिकतर लोगों की शिकायतें निस्तारित ही नहीं होतीं, लेकिन उनकी शिकायतों पर रिपोर्ट जरूर लगा दी जाती है। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारी यह भी नहीं पूछते कि पीड़ित पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं।
एक अप्रैल से अब तक 540 शिकायतें आ चुकी हैं। केवल माह के आखिर में शिकायतों और उनके निस्तारण का आंकड़ा तैयार कर लिया जाता है। उसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी जाती है। फिर उसी रिपोर्ट के आधार पर अपनी पीठ भी थपथपा ली जाती है। आखिर उन शिकायतों की सच्चाई क्या है, कभी उस पर गौर नहीं दिया गया। आज भी तमाम शिकायतकर्ता प्रार्थना लेकर घूम रहे हैं।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो लिया पोर्टल का सहारा
दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव सिमरिया निवासी मीरावती ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की कि उनकी बेटी मंजू 27 फरवरी को दसवीं की परीक्षा देने जा रही थी। तभी रास्ते में एक ई-रिक्शा ने टक्कर मार दी थी, जिससे उसको गंभीर चोटें आईं थीं। उन्होंने थाने में जाकर तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। इसके बावजूद पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया और न ही पुलिस उनके घर तक आई।
आठ माह शिकायत लेकर घूमे, पर नहीं हुई जमीन की नपत
इस्लामनगर क्षेत्र के गांव सिठौली निवासी विशनपाल सिंह का कहना है कि उनके खेतों से गंगा एक्सप्रेस वे गुजर रहा है, जिसमें उनके खेत चले गए हैं। अभिलेखों में उनकी जमीन ज्यादा है, लेकिन मौके पर आधी मौजूद है। चकबंदी के दौरान उन्हें वो जमीन दी गई थी, जो हकीकत में उनकी थी ही नहीं। चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने जमीन देने का आश्वासन भी दिया था। पिछले आठ माह से वह शिकायत लेकर घूम रहे हैं, लेकिन आज तक लेखपाल जमीन की नपत कराने तक नहीं पहुंचा है।
ग्रामसभा की जमीन पर अवैध कब्जा, नहीं पहुंचा लेखपाल
वजीरगंज क्षेत्र के गांव जखौलिया निवासी अहिवरन सिंह का कहना है कि उनके गांव में ग्राम सभा की जमीन तक पर अवैध कब्जा कर लिया है। यह कब्जा किसी और ने नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों ने किया है। और तो और उस पर निर्माण भी करा लिया है। वह अवैध कब्जा हटवाने के लिए कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हर बार लेखपाल आरोपियों से सांठगांठ कर मामला निपटा देता है। दो मई को उन्होंने फिर से जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की है, लेकिन अभी तक लेखपाल गांव नहीं आया है।
लेखपाल ने लगा दी फर्जी रिपोर्ट, नहीं किसी का कब्जा
म्याऊं ब्लॉक क्षेत्र के गांव बमनपुरा निवासी रामशरन का कहना है कि जब उनके गांव में प्रधान ने पार्क का निर्माण कराया था। तब सभी ग्रामीणों ने कहा था कि वह पार्क का निर्माण उस तरफ से कराएं, जहां पर लोगों ने सरकारी जगह पर अवैध कब्जा कर लिया है, लेकिन प्रधान अवैध कब्जा छुड़वाना तो दूर उस जगह को छोड़ दिया। इसकी शिकायत की गई, लेकिन लेखपाल ने फर्जी रिपोर्ट लगा दी कि वहां किसी का कब्जा है ही नहीं। अब उन्होंने फिर से उस पर शिकायत की है।
पोर्टल पर रोजाना होती हैं 20-25 शिकायतें
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर रोजाना करीब 20-25 शिकायतें होती हैं। एक अप्रैल से अब तक के आंकड़े पर गौर करें तो 540 शिकायतें आ चुकी हैं। उनमें अधिकतर शिकायतों पर रिपोर्ट भी लगाई जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई है।