Budaun News: दिल खुद संभालें…जिला अस्पताल के भरोसे रहे तो पड़ सकता है महंगा

जिला अस्पताल। संवाद
बदायूं। सर्दियां आ चुकी हैं। ऐसे में यदि आपको हृदय संबंधी बीमारी है तो आपको अपना ख्याल खुद ही रखना होगा। क्योंकि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कोई काॅर्डियोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में यहां के भरोसे रहे तो महंगा पड़ सकता है।
सर्दियों में सांस और रक्तचाप (बीपी) के मरीजों के साथ दिल के रोगियों को भी खासी परेशानी उठानी पड़ती हैं। ठंड से रक्त वाहिनियों में अवरोध के कारण दिल की बीमारियों वाले मरीजों के लिए इस मौसम में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
जिला अस्पताल में करीब चार पहले एक हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती की गई थी, जिसके बाद लोगों को काफी सहूलियत मिली थी लेकिन इसके बाद डॉक्टर यहां से नोएडा चले गए। तब से अब तक यहां कोई हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है।
सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह के अनुसार, इस बारे में कई बार पत्राचार किया तो कई बार मीटिंग के दौरान अधिकारियों से भी कहा, लेकिन कोई डॉक्टर नहीं मिला। सीएमएस के अनुसार, अस्पताल में हृदय रोगों की जांच के लिए केवल ईसीजी की सुविधा ही उपलब्ध है लेकिन वह भी यहां मौजूद केवल एक टेक्नीशियन के भरोसे है।
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मेडिकल कॉलेज का भी यही हाल
राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी कोई हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। जानकार बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज में अभी केवल एमबीबीएस की पढ़ाई होती है। यहां कोई एमडी नहीं है। जिन कॉलेजों में एमडी से आगे डीएम होता है वहां कॉर्डियोलॉजिस्ट होते हैं ताकि वे मरीजों का इलाज करने के साथ विद्यार्थियों को पढ़ा भी सकें।
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ईको और टीएमटी के लिए भागना पड़ता है दूसरे शहर
आजकल के खानपान और जीवनशैली को देखते हुए युवा भी दिल से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि ईसीजी में बीमारी निकलकर नहीं आती है तो लक्षणों के आधार पर डॉक्टर मरीज को ईको और फिर टीएमटी की सलाह देते हैं लेकिन दोनों ही सुविधाएं यहां नहीं हैं। हालांकि कुछ प्राइवेट डॉक्टरों के यहां यह मौजूद हैं लेकिन आपात स्थिति को देखते हुए लोग बरेली या फिर आगरा, लखनऊ, दिल्ली को प्राथमिकता देते हैं।
कैसे पहचाने हृदय रोग
– दौड़ते समय या तेज चलने पर सीने में दर्द
– सीने में जलन या भारीपन
– बाईं तरफ आलपिन जैसा चुभना जो बाएं हाथ तक जाता हो
– लगातार अपच या एसीडिटी की समस्या, जिसे लोग अक्सर बदहजमी समझ लेते हैं।
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कोलेस्ट्राॅल रखें नियंत्रित
शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अधिकता ही हृदय रोगों का कारण बनती है। ये एचडीएल और एलडीएल दो प्रकार का होता है, जिनमें एलडीएल को सामान्यत: बुरा काेलेस्ट्राल भी कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, पुरुषों के शरीर में एचडीएल की मात्रा 50 और महिलाओं में 40 से ऊपर होनी चाहिए जबकि एलडीएल सामान्य व्यक्ति में 130 से नीचे तथा दिल के रोगियों में 100 से नीचे होना चाहिए। इससे कम या ज्यादा होने पर सचेत होने की जरूरत है।
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जांच में ईसीजी ज्यादा नहीं कारगर
कई बार धमनियों में ब्लॉकेज होने के बाद भी ईसीजी से तस्वीर साफ नहीं होती। दरअसल ईसीजी मरीज को लिटाकर किया जाता है। ऐसे में दिल को खून पंप करने के लिए 10 की स्पीड चाहिए होती है जबकि दौड़ने की अवस्था में यही स्पीड 30 की हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज का टीएमटी करने की जरूरत होती है। इसमें दौड़ते हुए मरीज के हृदय की स्थिति में जो परिवर्तन होते हैं, उसके माध्यम से रोग का अंदाजा लगाया जाता है। इसके अलावा सीटी एंजियोग्राफी से धमनियों की सही ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है। ऐसे में इन सुविधाओं के लिए भी मरीजों को जिले से बाहर भागना होता है।
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सर्दियों में ऐसे रखें ख्याल
सर्दियों के मौसम में हृदय रोगियों को खास ख्याल रखना चाहिए। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुरेश चंद्र नौगरिया के अनुसार, इस समय सामान्य व्यक्ति को भी सुबह एकदम बिस्तर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। मॉर्निंग वॉक हृदय रोगियों के लिए काफी फायदेमंद हैं लेकिन सुबह की सर्दी में इससे बचना चाहिए। खासकर कोहरे में तो घर से नहीं निकलना चाहिए। कोहरे और धुंध का सीधा असर फेफड़ों और दिल पर पड़ता है, ऐसे में बचाव आवश्यक है। ज्यादा तला भुना और मसालेदार खाने से बचना चाहिए। यही नहीं शादी या ऐसे किसी आयोजन में पहले से कटे सलाद को तो बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।