Budaun News: गंगा नदी के उफान ने छीन ली छत

सहसवान के वीरसहाय नगला में इस स्थिति में रह रहे लोग। संवाद
वीरसहाय नगला के ग्रामीणों ने कच्ची सड़क पर बनाए आशियाने, पन्नी तानकर परिवार सहित रह रहे लोग, जानवर भी बांधे
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। गंगा नदी के उफान से सहसवान और उसहैत इलाके के दर्जनों गांवों में लोगों की जिंदगी ठहर गई है। यहां हालात इस कदर खराब हैं कि ग्रामीणों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सहसवान के तौफीनगला और तेलिया नगला तो उजड़ गए। यहां के कुछ ग्रामीण पुल पर तो कुछ इधर उधर ऊंचे स्थानों पर अपने परिवार के साथ दिन गुजार रहे हैं।
सहसवान इलाके में वैसे तो करीब एक दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं लेकिन तौफीनगला तथा तेलियानगता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। तौफीनगला के लोग जहां महावा पुल पर शरण लिए हुए हैं तो वहीं तैलियानगला तो बिल्कुल ही उजड़ गया है। गांव के सारे घर बाढ़ के पानी में समा चुके हैं। वीरसहायनगला और भमरौलिया का भी यहीं हाल है। भमरौलिया में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है तो वीरसहाय नगला के लोगों ने सड़क पर पन्नी के डेरा तंबू लगाकर अपने पशु बांध लिए हैं।
दातागंज में हजरतपुर बाढ़ चौकी से संबद्ध गांव सकतपुर पानी से घिरा है तो नगरिया खनू के पुल से कुड़रा मजरा को जाने वाला रास्ता बंद है। यहां पानी भरा है, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां कुछ ग्रामीणों ने ट्रैक्टर ट्राली एक पार से दूसरे पार जाने को लगा रखे हैं जो प्रति व्यक्ति सौ से डेढ़ सौ रुपये एक तरफ का ले रहे हैं। जिन ग्रामीणों को दूसरी पार काम होता है वे ट्राली पर बाइक रखकर ले जाते हैं और अपना काम निपटाकर वापस आ जाते हैं।
उसहैत। क्षेत्र के गांव बेहटी का हाल बुरा है। यहां पूरा गांव ही बाढ़ की चपेट में है तो स्कूल बाढ़ के पानी की भेंट चढ़ चुका है। प्रशासन ने अस्थायी तौर पर घसनगला स्कूल समेत सचिवालय में ग्रामीणें के रुकने की व्यवस्था की है, लेकिन रोजमर्रा के कामों के लिए ग्रामीणों को परेशानी उठानी ही पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन की ओर से राहत सामग्री दी तो जा रही है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। बड़े परिवारों में दस किलो आटा और चावल अपर्याप्त साबित हो रही हैं। हालांकि प्रशासन लगातार जरूरत के अनुसार राशन सामग्री देने का दावा कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन ने रहने के लिए सौ-सौ गज जमीन देने की बात तो की है, लेकिन यह बाढ़ का दौर गुजर जाने के बाद की बात है।
गंगा और रामगंगा का बढ़ा जलस्तर
बदायूं। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश का असर मैदानी इलाकों पर भी नजर आ रहा है। गंगा और रामगंगा का जलस्तर बीच मे कुछ घटना शुरू हुआ था लेकिन अब जलस्तर बढ़ने से वही हालात हो रहे हैं। सोमवार को गंगा का जलस्तर 162.67 मीटर दर्ज किया गया था जो मंगलवार को बढ़कर 162.69 मीटर हो गया। बुधवार को गंगा का जलस्तर 162.71 मीटर हो गया। गंगा पर खतरे का निशान 162 मीटर पर है। जलस्तर बढ़ने का असर गंगा किनारे के इलाकों में साफ नजर आ रहा है। इधर रामगंगा का मंगलवार को रहा जलस्तर 160.050 मीटर बुधवार को 160.200 मीटर हो गया। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गंगा किनारे के गांवों के लोगों में भय है।
ग्रामीणों का दर्द उनकी जुबानी
बिजली नहीं मिल रही, अंधेरे में कट रही रातें
सहसवान। वीरसहायनगला के रामवीर बताते हैं कि गांव में पानी भरा है। ऐसे में रोजमर्रा के काम नहीं हो पा रहे हैं। पशुओं के चारे की दिक्कत है तो गांव में बिजली नहीं आ रही है। रात अंधेरे में या नामालूम सी रोशनी में गुजारनी पड़ रही है। कुछ लोगों ने चार्ज करने वाली लाइटें से रात का अंधेरा दूर कर रहे हैं लेकिन इन्हें चार्ज करने के लिए भी दूसरे गांवों तक दौड़ लगानी पड़ रही है। कुछ लोग मोमबत्ती जलाकर ही रात बिताने पर मजबूर हैं। पानी ज्यादा होता है तो नाव से जाते हैं। खिरकवारी के प्रधान नरेशपाल कहते हैं कि गांव में बीमारी फैल रही हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम दिखावे को आती है। बुधवार को भी टीम जरा देर गांव में आकर रुकी और दवाएं आदि देकर चली गई। ऐसे में गांव के ज्यादातर लोग एकत्र भी नहीं हो पाए।
बर्बाद हो गई फसल, अब खाने के भी लाले
उसहैत क्षेत्र के गांव बेहटी के प्रमोद कुमार बताते हैं कि उन्होंने छह बीघा जमीन में मक्का, पांच बीघा में मूंगफली और करीब डेढ़ बीघा में अरबी की फसल की थी, लेकिन बाढ़ के पानी ने सब फसल चौपट कर दी। अब परिवार के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है। बताते हैं कि उनकी परिवार में दो छोटे बच्चों के साथ भाई आदि भी हैं लेकिन राहत के नाम पर प्रशासन द्वारा दी गई सामग्री पर्याप्त नही हो पा रही हैं। गांव के मेघनाद बताते हैं कि गांव में पानी भर जाने से रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। दुर्वेश कहते हैं कि बाढ़ से उनकी करीब 50 बीघा फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने मूंगफली और मक्का की फसल की थी। अभी तो जैसे तैसे दिन कट रहे हैं लेकिन बाद में परिवार की आजीविका चलाना भी मुश्किल होगी।
वाटर डिस्चार्ज
नरौरा- 1,62,120 क्यूसेक
बिजनौर- 1,51,617 क्यूसेक
हरिद्वार- 1,35,911 क्यूसेक
एसडीएम ने किया पथरामई तटबंध का निरीक्षण
दातागंज। एसडीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बुधवार को पथरामई तटबंध का निरीक्षण किया। यहां की स्थिति संवेदनशील है परंतु प्रशासन द्वारा कटान रोधी कार्य कराया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, इससे तटबंध सुरक्षित हैं और परिस्थितियां नियंत्रण में हैं। एसडीएम ने बताया कि कटान रोकने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जहां खतरा लगता है वहां स्थिति के अनुसार, काम कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य शिविर लगवाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। पशुओं के इलाज की भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए टीमें लगाई गई हैं।
बाढ़ के कारण सहसवान तथा उसहैत क्षेत्र के गांवों के लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। जिन सड़कों पर गांव वाले साइकिल और बैलगाड़ी से चलकर अपनी दिनचर्या पूरी करते हैं वहीं उन्हें उन्हीं सड़कों से गुजरने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। दिन तो जैसे तैसे गुजर जाता है लेकिन रात मुश्किल से कट रही है। कहीं बिजली नहीं तो कहीं हर तरफ पानी, ऐसे में कब दिन निकलेगा, इसी को सोचते हुए ग्रामीण रात बिता रहे हैं।

सहसवान के वीरसहाय नगला में इस स्थिति में रह रहे लोग। संवाद

सहसवान के वीरसहाय नगला में इस स्थिति में रह रहे लोग। संवाद

सहसवान के वीरसहाय नगला में इस स्थिति में रह रहे लोग। संवाद