Budaun News: जिम्मेदारों की मेहरबानी से अवैध पैथोलॉजी लैब का फैल रहा मकड़जाल
बदायूं। पैथोलॉजी लैब तो जिले में मात्र 10 ही पंजीकृत हैं, लेकिन कलेक्शन सेंटरों के नाम पर अवैध लैब का मकड़जाल फैला हुआ है। गली-कूचों तक में कलेक्शन सेंटर चल रहे हैं। ये सेंटर ब्लड सैंपल तो ले रहे हैं लेकिन रखरखाव ठीक न होने से मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। कुछ ही समय के अंतराल में कराई गई जांच रिपोर्ट में भिन्नता देखने को मिल रही है।
स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती के चलते जिले में अवैध पैथाेलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। गांवों-कस्बों तक कहीं एक कमरे में तो कहीं संकरी गलियों में पैथोलॉजी चल रही है। अप्रशिक्षित कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। हाल यह है कि एक ही सैंपल की अलग-अलग रिपोर्ट आती है और रेट भी अलग अलग है।
इन रिपोर्ट पर कितना भरोसा किया जाए, यह चिकित्सक भी समझ नहीं पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जिले में लगभग 10 पैथोलॉजी पंजीकृत हैं, जबकि हकीकत में कई गुना पैथाेलॉजी लैब चल रही हैं। शहर की बात की जाए तो हर मोहल्ले में कई लैब हैं। आंवला रोड पर करीब 10 पैथोलॉजी लैब और सेंटर हैं।
जिला अस्पताल आए मरीज कल्लू ने बताया कि शहर की एक पैथोलॉजी लैब से जांच करवाई थी तो प्लेटलेट्स 80 हजार थी। कुछ देर बाद ही दूसरी पैथोलॉजी पर सैंपल दिया तो वह एक लाख से ज्यादा निकली। चिकित्सक भी दो रिपोर्ट देख हैरत में पड़ गए। यह हाल केवल शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में बना हुआ है। सहसवान,उझानी, बिल्सी, बिसौली,सैदपुर वजीरगंज, कुंवरगांव विनावर, दातागंज अलापुर म्याऊं उसहैत उसावां में भी यही हाल है।
बिसौली में एक भी लैब पंजीकृत नहीं पर कलेक्शन एजेंट तमाम
बिसौली। कस्बे में हर जगह कलेक्शन एजेंट मौजूद हैं। जो पैथोलॉजी लैब हैं वे बिना पंजीकरण के चल रही हैं। सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. पवन कुमार के अनुसार, कस्बे में एक भी पैथोलॉजी पंजीकृत नही हैं। इन पैथाेलॉजी में विभिन्न जांचों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित है। कुछ पैथाेलॉजी लैब अपने कलेक्शन सेंटर भी चला रही हैं। इनमें से अधिकतर सीएचसी परिसर के आसपास मौजूद हैं। तीमारदारों का आरोप है कि कई बार चिकित्सक प्राइवेट जांच के लिए भी मौखिक रूप से कलेक्शन सेंटर का नाम लेकर जांच कराने को कहते हैं। यहां अप्रशिक्षित लोग ब्लड सैंपल निकालने से लेकर सभी जांचें करते हैं।
जिले में अवैध पैथाेलॉजी को चलने नहीं दिया जाएगा। जल्द ही इनके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इनके रेट निर्धारण को लेकर कोई नियम नहीं है। – डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, मुख्य चिकित्साधिकारी