चाहे बम गिरे या आए सुनामी, भारत में रुकेगा नहीं डिजिटल अधिकार! इसकी तैयारी में रिजर्व बैंक
तकनीक से काम आसान होता है, लेकिन इसके साथ अलग-अलग लक्षण और जोखिम जुड़े होते हैं। क्रिएट वर्षों में यू स्पष्टीकरण (यूपीआई) सहित अन्य नए लिंक ने भारत में डिजिटल पंजीकरण (डिजिटल भुगतान) को दूर-दराज के बारे में बताया है। इससे अपना काम आसान हो जाता है और कैश लेकर चलने की जरूरत खत्म हो जाती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसा संभव है कि ये सिस्टम अचानक काम करना बंद कर दें। रिजर्व बैंक ने खुद यह बात स्वीकार की है।
पूरी तरह से अलग प्रणाली होगी
रिजर्व बैंक ने मंगलवार को ब्लूप्रिंट रिपोर्ट (आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट) में इन आशंकाओं पर बात की है। सेंट्रल बैंक ने साथ ही बताया है कि वह किसी भी हालत में काम करने वाली भुगतान प्रणाली तैयार कर रहा है। यह प्राकृतिक प्रणाली पुरातन और युद्ध जैसी विनाशकारी घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण लिकेज के लिए उपयोगी होगी। यह नई व्यवस्था मौजूदा भुगतान से अलग होगी।
एमबीआर ने ये नाम दिया है
रिज़र्व बैंक ने प्रस्तावित आपातकालीन प्रणाली को ‘लाइट वेट एंड पोर्टेबल देनदारी सिस्टम’ यानी ऑल्स्टएसएस (LPSS) का नाम दिया है। उन्होंने कहा कि 1.1.11 करोड़ कर्मचारी पारंपरिक रूप से अलग होंगे और यह बहुत कम कर्मचारियों को कहीं से भी संचालित कर रहा है। ऐसे में यह किसी भी आपात स्थिति में डिजिटल होने की गारंटी देगा।
अभी काम हो रहा है
आपको बता दें कि बड़े मात्रा में भुगतान के लिए रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट यानी RTGS (RTGS), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ऑफरिंग एनईएफटी (एनईएफटी) और यूनिऑर्डिनेटेड पार्टियां लिओ वाई यूमाइंड (UPI) जैसी मौजूदा भुगतान प्रणालियां तैयार की हैं। ये सब्सक्राइब के साथ एक खामी है कि इसके लिए इसे इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉम्प्लेक्स स्टीक के नेटवर्क के लिए आगे बढ़ाना आवश्यक है।
इन नियति में ठप हो जाएंगे
अब मान प्रेरित कि दुश्मन देश भारत पर हमला करता है और भयंकर युद्ध छिड़ जाता है। ऐसे में आरटीजीएस, एनई एफ़टी या यूब्राइंडिया जैसे सिस्टम को चलाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि उनके लिए जरूरी इंफ्रा नहीं जमा होगा। इन्हें चलाने के लिए लोगों की जरूरत होती है। यह भी एक चुनौती है। इसी तरह कोई भी सिनिस्टर प्राकृतिक आपदा पूरी सिस्टम को खत्म कर सकती है। अपकार ठप हो जाने से कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं और पूरा देश एक संकेत में ठिठक सकता है। इन छिपे हुए नियमों को ध्यान में रखते हुए नई प्रणाली विकसित की जा रही है।
रिपोर्ट में सेंट्रल बैंक ने कही ये बात
मंगलवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रकृतिक वन्यजीव और युद्ध जैसी घटनाओं में मौजूदा प्रणालियां अस्थायी रूप से बंद हो सकती हैं। इसलिए ऐसे विषम सूक्ष्म का सामना करने के लिए तैयार रहने में समझदारी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रमाणन पॉलिसी एसएससी की परिभाषा है, जो पारंपरिक तकनीकों से स्वतंत्र होगी और बेहद कम कर्मचारियों के साथ इसे कहीं से भी संचालित किया जा सकता है।
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