पीलीभीत

पहले थे रोटी के लाले, आज काफिलों के साथ चल रहे: वरुण गांधी

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– सांसद ने पूरनपुर क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में जनसंवाद कार्यक्रमों को किया संबोधित

संवाद न्यूज एजेंसी

पीलीभीत। पीलीभीत में दो दिवसीय दौरे पर रविवार को पहुंचे सांसद वरुण गांधी ने पूरनपुर क्षेत्र के गांवों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों को संबोधित किया। उन्होंने बिना नाम लिए कुछ क्षेत्रीय नेताओं पर सवाल उठाया, कहा- जिनके पास पहले खाने के लिए रोटी तक नहीं थी, आज वह बड़े-बड़े काफिले में चल रहे हैं।

सांसद ने कहा कि उनके पिता ने एक लाख करोड़ की मारुति कंपनी देश के नाम दान दे दी थी, क्या आज के नेता ऐसा कर पाएंगे। आज कोई 500 रुपये टेबल पर छोड़ने को तैयार नहीं है, एक लाख करोड़ की बात ताे बहुत दूर है। सांसद ने जनता से कहा, आप लोगों को अच्छे, बुरे की पहचान है, आपको यह सिखाने की जरूरत नहीं है। पीलीभीत और देश के साथ जो रिश्ता बनाया है, वह रिश्ते हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

उन्होंने कहा, जब आप दिल्ली, जयपुर, पटना, कोलकाता, सोनीपत, मुंबई आदि शहरों में जाते हैं, तो वहां बोलते हो कि वरुण गांधी और मेनका गांधी वाले पीलीभीत से हूं, यही पूंजी हमारे लिए काफी है। उन्होंने गांव बैजूनगर, विधिपुर, इटोरिया, शिवनगर, बानगंज, ग्रांट, लालपुर, नदहा, सिसैया, पिपरिया आदि में जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद प्रतिनिधि राजू आचार्य, राजेश प्रधान, जीवन लाल, रामशंकर, मुनीश गुड्डू, हरीश कश्यप, देवेंद्र सिंह, महावीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, पंडित रामेश्वर दयाल, निरंजन लाल, राजेंद्र प्रसाद वर्मा, संतराम विश्वकर्मा, डॉ हेमराज शर्मा, ध्रुव सिंह, मनोज वर्मा, रामरतन पासवान, ब्रह्मस्वरूप त्रवेदी, छेदालाल गंगवार, डीपी यादव, दशरथ गूजर, राहुल पांडेय, बलजीत सिंह, सतनाम सिंह, सर्वजीत सिंह आदि मौजूद रहे।

संविदाकर्मी दूध में मक्खी की तरह

सांसद ने कहा, हमारे देश में 90 फीसदी सरकारी नौकरी संविदा पर हो रही हैं, संविदा की नौकरी असली नौकरी नहीं है। किसी आशा बहू, आंगनबाड़ी, शिक्षामित्र या किसी अन्य संविदा कर्मचारी से पूछो तो वे कहते हैं कि जब उनसे काम लेना होता है तो काफ़ी काम लेते है, लेकिन जब उनको निकालना होता है तो दूध में मक्खी कि तरह निकलकर फेंक देते हैं। न कोई सुरक्षा है न भविष्य। आपको ऐसे लोग राजनीति में चाहिए जो आपके लिए आपके हक की लड़ाई लड़ सकें, सच्चाई बोल सकें, अगर हर आदमी मीठी-मीठी बात करेगा, तो देश कैसे खड़ा होगा।

ऋण प्रणाली पर उठाए सवाल

सांसद ने ऋण प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज ऋण की जरूरत जितनी गरीबों को है, उतनी उद्योगपतियों को नहीं है, लेकिन उद्योगपतियों को आसानी से लोन मिल जाता है। अगर कोई उद्योगपति लोन नहीं चुका पाता है, तो उनसे सिर्फ मूलधन जमा करने को कह दिया जाता है, लेकिन अगर कोई गरीब लोन नहीं चुका पाता है तो उनके घर की कुर्की करने की तैयारी शुरू कर दी जाती है।


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