फर्म का दावा : एक डायलाइजर से दस बार डायलिसिस का अनुबंध, निशुल्क नहीं दवा
बरेली। जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का संचालन कर रही फर्म का दावा है कि एक डायलाइजर से एक मरीज की दस बार डायलिसिस करने का अनुबंध है। दवाएं भी निशुल्क नहीं हैं। वहीं, बदायूं में एक डायलाइजर से पांच बार ही डायलिसिस होती है। दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं। इस दावे से अनुबंध की शर्तों पर सवाल उठ रहे हैं। शासन स्तर से हुए अनुबंध की जानकारी स्थानीय अधिकारियों को भी नहीं है। वह अभिलेख मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित हीमो डायलिसिस यूनिट में पहुंच रहे मरीज खून बढ़ाने वाले इंजेक्शन समेत अन्य दवाएं खुद ही खरीद रहे हैं। प्रकरण संज्ञान में आने पर एडी एसआईसी ने संचालन कर रही फर्म हेरिटेज हॉस्पिटल से जवाब तलब किया था। फर्म का दावा है कि शासन से अनुबंध में एक डायलाइजर से एक मरीज की दस बार डायलिसिस का करार है। ईपीओ इंजेक्शन, खून बढ़ाने की दवा मरीज नेफ्रोलॉजिस्ट के सुझाव पर खरीद रहे हैं। एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने फर्म के दावों को दरकिनार कर अनुबंध के दस्तावेज मुहैया कराने के लिए कहा है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
जिला अस्पताल बदायूं में निशुल्क डायलिसिस सेवा के लिए डीसीडीसी किडनी केयर से शासन का अनुबंध है। पिछले माह से सेवाएं शुरू हुईं हैं। यूनिट प्रबंधक मनोज कुमार के मुताबिक एक रुपये के सरकारी पर्चे पर अनुबंध के तहत एक डायलाइजर से एक मरीज की पांच बार ही डायलिसिस हो रही है। मरीजों को जरूरी दवाएं यूनिट से ही जा रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक डायलाइजर कृत्रिम किडनी होती है जो शरीर के अशुद्ध और शुद्ध रक्त को छानकर अलग करता है। एक डायलाइजर से एक ही मरीज की पांच बार डायलिसिस करना बेहतर होता है। ज्यादा बार प्रयोग करने से अगर किन्हीं वजहों से रक्त के टॉक्सिन डायलाइजर में बच गए तो मरीज को दिक्कत होने की आशंका रहती है।
पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस यूनिट के निशुल्क संचालन के लिए निजी फर्म से शासन स्तर पर अनुबंध किया गया है। इसके नियम व शर्तों के बारे में जानकारी की जाएगी। शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। – डॉ. पुष्पा पंत, एडी हेल्थ


