हार्टअटैक था तब रात में आधे घंटे का सफर 1:20 घंटे में तय किया पुलिस ने
पीलीभीत। पुलिस हिरासत में हुई वशी की मौत के मामले में पत्नी की खामोशी के बाद भले ही पुलिस कर्मियों ने राहत की सांस ली हो, लेकिन कई सवाल हैं जो बता रहे हैं कि पुलिस की कहानी में खासा झोल है। जिस वशी की तबीयत बरखेड़ा सीएचसी पर डॉक्टर ने बेहद नाजुक बता दी थी उसे बरखेड़ा से जिला अस्पताल तक लाने में पुलिस ने एक घंटा 20 मिनट लगा दिए, जबकि रात का समय व पुलिस की गाड़ी थी। आम आदमी बाइक से 35 से 40 मिनट में आ जाता है।
पुलिस हिरासत में मरे वशी खां की मौत के मामले में उसकी पत्नी भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन मामला जिले में चर्चा में है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वशी की पुलिस हिरासत में बरखेड़ा थाने में रात में तबीयत खराब हुई। इसके बाद दरोगा मनवीर उसे 10:45 बजे सीएचसी बरखेड़ा लेकर पहुंचे। यहां इलाज कराने के बाद उन्हें इंजेक्शन दिया गया। इसके बाद थाने ले आया गया। रात 2:35 बजे तबीयत फिर बिगड़ने पर दरोगा मनवीर उसे अपनी गाड़ी से लेकर बरखेड़ा सीएचसी फिर पहुंचे। हालत गंभीर देख सीएचसी से उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बरखेड़ा से मेडिकल कॉलेज की दूरी करीब 23 किलोमीटर है। आम आदमी बाइक से 35 से 40 मिनट में आराम से आ जाता है, जबकि पुलिस रात के समय में एक घंटा 20 मिनट में पहुंची। यहां अस्पताल में दरोगा मनवीर ने नहीं, बल्कि सिपाही अंकित कुमार ने वशी को भर्ती कराया। डॉक्टरों ने देखते ही वशी को मृत घोषित कर दिया। इतनी देर कहां लगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं।
इसके अलावा थाने में कुछ समय पहले ही कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस ने वशी को हवालात में रखा होगा या फिर मुंशी के कक्ष में बैठाया होगा। हालांकि दोनों ही जगह कैमरे लगे हैं। अगर वशी थाने लाया गया होगा तो साफ है कि वशी की तबीयत भी यहीं खराब हुई होगी। सच्चाई से पर्दा उठाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग पर्याप्त है, लेकिन पुलिस यह रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं कर रही। सबसे अहम बात है कि हिरासत में मौत के मामले में न किसी के बयान दर्ज, न कोई जांच, सीधे क्लीन चिट। बहरहाल, मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग में की गई है। जांच होेने पर पुलिसकर्मियों को वहां इन बिंदुओं पर जवाब देना होगा।