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पीएफ खाताधारक हो जाएं अलर्ट! अकाउंट में हेरफेर कर इन अकाउंट से निकाल लिए गए करोड़ों रुपये

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सेक्टर में काम करने वालों के लिए प्रोविडेंट फंड (प्रोविडेंट प्राइवेट फंड) यानी पीएफ सामाजिक सुरक्षा का बड़ा आधार है। यह कई बार आपात स्थिति में ज़रूरतों पर बहुत काम साबित होता है। इसके अलावा विनाश के बाद के जीवन को भी इससे सुरक्षा मिलती है। लेकिन क्या हो, अगर कोई आपका पीएफ खाता खाली कर दे?

हैरान कर देने वाला मामला बनेगा

यह कोई बेतुका सवाल भी नहीं है। इससे एक ऐसा ही अजीब मामला सामने आया है, जिसे जानने के बाद आप न सिर्फ हैरान होंगे, बल्कि परेशान भी हो जाएंगे। इस मामले में सीबीआई ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो आधार कार्ड (आधार कार्ड) से जुड़ी जानकारियों के साथ छेड़छाड़ करके दूसरे के पीडीएफ अकाउंट से पैसे निकालता था। गिरफ्तार व्यक्ति के ऊपर आरोप है कि उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर इस तरह से करोड़ों रुपये की निकासी की।

ऐसे लोग गुटके के शिकार बन जाते हैं

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में सीबीआई के अधिकारियों के बारे में जानकारी दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली के प्रियांशु कुमार नामक व्यक्ति ने अपने साथियों के साथ मिलकर इसे अंजाम दिया है। अनन्य ने ऐसे लोगों को लक्षित बनाया, जिन्होंने अभी तक अपने ईपीएफ खाते को आधार से लिंक नहीं किया था। ऐसे लोगों के पीडीएफ अकाउंट से एक साथ मिलकर करोड़ों रुपये निकालने के लिए।

करीब 2 करोड़ रुपये का फ्रॉड

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियांशु कुमार और उनके साथियों ने 11 पीएफ अकाउंट से 1.83 करोड़ रुपए निकाले हैं। उन्होंने ये निकासी करने के लिए 39 फर्जी दावे किए। इस मामले में सीबीआई ने पिछले साल 8 फरवरी को सात फैसले और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सीबी ने यह मामला ईपीएफओ की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। ई पीएफओ ने वास्तविक दिखने के पीएफ खाते से गलत तरीके से पैसे निकालने के लिए पहचान से जुड़ी हुई शिकायत की थी।

इस कारण गड़बड़ी की आशंका है

प्रियांशु कुमार और उनके गुट ने नागपुर, औरंगाबाद, पुणे और रांची जैसे शहरों में पंजीकरण संबंधी पंजीकरण किया था। इनमें से किसी मैनुअल वेरिफिकेशन के पीएफ कवरेज के लिए नहीं गए थे। जब जांच की गई तो पता चला कि इन अटकलों के साथ लिंक्ड यूनिक अकाउंट नंबर की संख्या योगदान देने वाले कुल अकाउंट की संख्या से ज्यादा थी। इससे फ्रॉड का संदेह पुख्ता हुआ।

गुट के मोडस ओपरांडी

सीबी के अनुसार, ये लोग अपनी शर्तों में ऐसे लोगों के यूएन को रजिस्टर कर लेते हैं, जो वास्तव में पीडीएफ अकाउंट के लाभार्थी हैं। दिखाने को सिर्फ एक दिन के लिए अपने प्रतिष्ठान के कर्मचारियों को दिखाया गया था। इससे संबंधित निर्णय को केवाईसी के विवरण को बदलने का अधिकार मिल गया था। इसके बाद गैट के आधार पर सूचनाओं के साथ वह निश्चित करता था और वास्तविक घोषणाओं के नाम पर निकासी का दावा करता था। इस तरह से दूसरे के पीडीएफ अकाउंट से पैसे निकाल रहे थे।

तलाशी में कई सबूत मिले हैं

एजेंसी की खबर के मुताबिक, सीबीआई ने इस मामले में बिहार, झारखंड और दिल्ली में गुट से जुड़े आठ परिसरों की तलाशी ली थी, जिसमें कई दस्तावेज, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक जैसे सबूत बरामद हुए थे। सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि एक विशेष अदालत ने गिरफ्तार किए गए प्रियांशु कुमार को चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

बचने के लिए क्या करें

डिजिटल होते दौर में फ्रॉड करने के तौर-तरीके बदल रहे हैं। हालांकि इस तरह के फ्रॉड की आशंकाओं को सतर्कता से बहुत कम किया जा सकता है। सबसे पहले उन धारणाओं के मौजूद होने पर उपायों को अमल में लाना चाहिए। अगर आपका भी पीडीएफ अकाउंट है और आपने अब तक उसे आधार से लिंक नहीं किया है तो बिना विलंब के यह काम कर लें। आधार से लिंक होने की स्थिति में बिना आपकी सहमति के दावा करना काफी मुश्किल हो जाएगा। दूसरी बात यह है कि पीडीएफ अकाउंट को बीच-बीच में चेक करते रहना चाहिए। किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका होने पर ईपीएफओ को सूचित करना चाहिए।

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